
China जनरेटिव AI के जरिए लोगों को भड़का रहा…रिपोर्ट में हुआ खुलासा
AI in Propaganda War: चीन तेजी से जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल दुष्प्रचार अभियानों के लिए कर रहा है। इसका मकसद विभिन्न देशों की छवि खराब करना और खासकर विकासशील देशों के युवाओं की राय को प्रभावित करना है। यह खुलासा द डिप्लोमैट की हालिया रिपोर्ट में किया गया है।
एआई से तैयार किया जा रहा है भ्रामक कंटेंट
रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों के अनुरूप भ्रामक सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया के जरिए फैला रहा है। इसका इस्तेमाल खासकर हांगकांग और ताइवान के दर्शकों को टारगेट करने और अमेरिकी सांसदों पर निगरानी रखने के लिए भी किया गया। आशंका जताई गई है कि आगे चलकर इसका उपयोग खुफिया अभियानों में हो सकता है।
निजी कंपनी से जुड़े दस्तावेजों का खुलासा
अमेरिका के वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों ने अगस्त 2025 की शुरुआत में एक निबंध प्रकाशित किया था, जिसमें चीनी निजी फर्म गोलाक्सी से जुड़े दस्तावेजों का बड़ा संग्रह साझा किया गया। इनसे पता चला कि एआई टूल्स का इस्तेमाल दुष्प्रचार फैलाने के लिए व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है।
फर्जी वेबसाइटें और डीपफेक
पहले चीन से जुड़े अभियानों में फर्जी व्यक्तित्व और डीपफेक का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब रणनीति बदलकर पूरी तरह नकली समाचार वेबसाइटें बनाने पर जोर दिया जा रहा है। पिछले महीने ग्राफिका की “फाल्सोस एमिगोस” रिपोर्ट ने 11 फर्जी वेबसाइटों के नेटवर्क की पहचान की, जो दिसंबर 2024 और मार्च 2025 के बीच बनाई गईं। इनमें एआई-जनरेटेड तस्वीरों का उपयोग लोगो और कवर इमेज के रूप में किया गया।
ओपनएआई और मेटा की रिपोर्ट
जून 2025 में प्रकाशित ओपनएआई की ‘थ्रेट रिपोर्ट’ में खुलासा हुआ कि कुछ प्रतिबंधित चैटजीपीटी अकाउंट्स ने फर्जी समाचार पेजों के लिए नाम और प्रोफाइल तस्वीरें तैयार कीं। इनका इस्तेमाल अमेरिकी राजनीति पर ध्रुवीकरण बढ़ाने और ट्रंप प्रशासन की आलोचना करने के लिए किया गया। इस अभियान को “अंकल स्पैम” नाम दिया गया था।
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मेटा ने भी पाया कि चीन से जुड़े अकाउंट्स ने टिकटॉक और फेसबुक पर फर्जी वीडियो अपलोड किए, जिनमें पाकिस्तानी कार्यकर्ता महरंग बलूच को बदनाम करने की कोशिश की गई। इसके बाद सैकड़ों एआई-जनरेटेड टिप्पणियां अंग्रेजी और उर्दू में पोस्ट की गईं।
सोशल मीडिया पर नकली जुड़ाव
चीन की एक और रणनीति ऑर्गेनिक एंगेजमेंट को नकली तरीके से बढ़ावा देना है। रिपोर्ट के अनुसार, एक “मुख्य अकाउंट” पोस्ट करता है और फिर उससे जुड़े अन्य अकाउंट्स उस पर बहस छेड़ते हैं ताकि चर्चा वास्तविक लगे। इस तरीके से अमेरिकी टैरिफ और चीन के निवेश जैसे मुद्दों पर भ्रम फैलाने का प्रयास हुआ।
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विशेषज्ञों की चेतावनी
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का यह प्रयास वैश्विक लोकतंत्र और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि इस पर तुरंत सोशल मीडिया कंपनियों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और लोकतांत्रिक सरकारों को मिलकर कार्रवाई करनी चाहिए।
साफ है कि जनरेटिव एआई सिर्फ तकनीकी विकास का औजार नहीं, बल्कि इसे दुष्प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
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