शरद ऋतु में बढ़ता ‘सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर’… जानें कारण, लक्षण और बचाव

Health Updates: शरद ऋतु गर्मी से सर्द मौसम की ओर बढ़ने का संकेत है। सितंबर से दिसंबर के बीच पेड़ों से पत्ते गिरते हैं और लोगों का मूड भी प्रभावित होता है। जैसे-जैसे दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं, कई लोग थकान, नींद की गड़बड़ी और उदासी जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इसे विज्ञान की भाषा में सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) कहा जाता है, जो डिप्रेशन का एक प्रकार है और खासकर सर्दियों की शुरुआत या दिन के उजाले में कमी के दौरान ज्यादा देखने को मिलता है।

‘सैड’ क्यों होता है?
1984 में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक नॉर्मन ई. रोसेन्थल ने इस स्थिति को सबसे पहले वैज्ञानिक रूप से पहचाना। मुख्य कारण है धूप की कमी। इससे दिमाग में सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर घट जाता है, जो मूड को नियंत्रित करता है। अंधेरा और ठंड बढ़ने पर शरीर अधिक मेलाटोनिन बनाता है, जिससे नींद ज्यादा आती है और ऊर्जा घट जाती है। इसके कारण सर्केडियन रिद्म भी प्रभावित होता है, जिससे नींद और जागने का पैटर्न बिगड़ जाता है।

किस पर अधिक असर होता है?

  • उत्तरी या पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग

  • महिलाएं

  • युवा (18–30 वर्ष)

2022 की जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर्स की स्टडी में पाया गया कि अर्बन इंडिया में 12-15 प्रतिशत लोग हल्के या गंभीर मौसमी डिप्रेशन यानि सैड से जूझते हैं।

सैड के लक्षण

  • लगातार थकान महसूस होना
  • अधिक नींद आना
  • उदासी या चिड़चिड़ापन
  • काम में रुचि कम होना
  • ज्यादा मीठा और कार्बोहाइड्रेट खाने की इच्छा
  • खुद को सामाजिक तौर पर अलग-थलग महसूस करना

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सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से बचाव के उपाय

पर्याप्त नींद लेना: नींद के पैर्टन में बदलाव की वजह से आपको यह समस्या हो सकती है। साथ ही, ब्रेन में थकान की वजह से डिप्रेशन हो रही है, तो ऐसे में पर्याप्त नींद लेने से आपको इसके लक्षणों में आराम मिलता है। साथ ही, मूड स्विंग्स में भी कमी आती है।

लोगों के साथ बातें शेयर करें: किसी विषय को लेकर आपको बार-बार चिंता सता रही है तो ऐसे में आप उस विषय पर अपने करीबियों और घर के लोगोंं के साथ बात कर सकते हैं। लोगों के साथ बात शेयर करने से आपका डिप्रेशन कम होगा और आपको आराम मिलेगा।

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं: गर्मियों के दिनों में शरीर में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन हो सकता है। पानी कम पीने और पसीना अधिक आने के कारण शरीर का एनर्जी लेवल कम हो सकता है। साथ ही, शरीर के अन्य अंगों पर भी दबाव पड़ता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

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सुबह व शाम को वॉक करें: यह समस्या कम लाइट की वजह होती है। ऐसे में आप सुबह शाम वॉक करते हैं, तो इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। साथ ही, शरीर में एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है। इसलिए सुबह व शाम के समय वॉक पर जरुर जाएं।

सूती कपड़े पहनें: गर्मियों के पसीने की वजह से कई तरह की समस्याओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में आप सूती कपड़े पहनें। दरअसल, गर्मियों में अन्य फैब्रिक के कपड़ों में पसीना अधिक आता है। ऐसे में पसीने की वजह से लोगों को परेशानी हो सकती है।

पर्याप्त धूप लें : सबसे पहले तो रोजाना कम से कम 20-30 मिनट धूप में रहें।

लाइट थेरेपी: विशेष लाइट बॉक्स का इस्तेमाल करें, जो प्राकृतिक धूप जैसा असर देता है।

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