बदलाव की जोर आजमाइश में तेजस्वी, सीट बंटवारे और सीएम चेहरे को लेकर महागठबंधन में उलझन

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक लड़ाई मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच मानी जा रही है। सत्ता पक्ष, एनडीए, पिछले 20 वर्षों के विकास कार्य और राज्य को विकसित बिहार बनाने के अपने एजेंडे के साथ चुनावी मैदान में उतरा है। वहीं विपक्षी पार्टियों के महागठबंधन ने नीतीश सरकार में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था की कमियों को लेकर चुनावी मुद्दा उठाया है।

राजद और महागठबंधन की रणनीति
पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में सफलता पाने के बाद इस बार भी राजद की उम्मीदें ऊँची हैं। हालांकि, इस चुनाव में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव अधिक सक्रिय नहीं हैं। सोशल मीडिया के जरिए वे अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन पार्टी का सारा दारोमदार उनके पुत्र तेजस्वी यादव पर है।

सीट बंटवारे और सीएम चेहरे को लेकर बढ़ी उलझन
महागठबंधन में सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री के चेहरे के चयन जैसे विवाद तेजस्वी यादव के सामने चुनौती बने हुए हैं। इसके अलावा, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी द्वारा उप मुख्यमंत्री पद के दावे ने महागठबंधन के अंदर उलझन बढ़ा दी है।

फिर भी, तेजस्वी यादव बिहार में सत्ता बदलाव की कोशिशों में सक्रिय हैं। वे राज्य के लोगों से लगातार वादे कर रहे हैं और महागठबंधन की सरकार द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर एनडीए के मुकाबले महागठबंधन की श्रेष्ठता साबित करने का प्रयास कर रहे हैं।

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महागठबंधन के दावे
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि महागठबंधन सरकार के 17 महीनों में पांच लाख से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी दी गई और जातीय जनगणना का कार्य संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार को बेहतर बनाने के लिए महागठबंधन जरूरी है।

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पिछले चुनाव का संदर्भ
पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 243 सीटों में राजद ने 75 सीटों पर जीत हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, जबकि भाजपा को 74 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। इस बार का चुनाव पिछले चुनाव की तुलना में और भी कड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबला कड़ा है। सीट बंटवारे, मुख्यमंत्री चेहरे के चयन और सहयोगी दलों की मांगों ने चुनावी रणनीति को जटिल बना दिया है। वहीं, जनता के बीच विकास, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे इस चुनाव को निर्णायक बना सकते हैं। तेजस्वी यादव और महागठबंधन की पूरी ताकत इस चुनाव में केंद्र में नजर आ रही है, जबकि एनडीए अपनी 20 साल की शासन-प्राप्ति और विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।

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