आठ साल बाद परिपक्व हुआ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, निवेशकों को मिला शानदार रिटर्न

SGB: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2017-18 सीरीज-VII ट्रेंच की परिपक्वता (maturity) गुरुवार को पूरी हो गई है। इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 13 नवंबर 2017 को जारी किया था। आरबीआई के अनुसार, इस सीरीज के निवेशकों को मैच्योरिटी पर ₹12,350 प्रति ग्राम की दर से भुगतान किया जाएगा, जो शुरुआती इश्यू प्राइस की तुलना में करीब चार गुना अधिक है।

आरबीआई ने बताया कि यह भुगतान दर इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा 10, 11 और 12 नवंबर 2025 को जारी की गई 24 कैरेट सोने की औसत कीमत के आधार पर तय की गई है।

निवेशकों को मिला शानदार रिटर्न
यह बॉन्ड आठ साल पहले ₹2,934 प्रति ग्राम पर जारी किया गया था। ऑनलाइन खरीद करने वालों को ₹50 प्रति ग्राम की छूट दी गई थी, यानी प्रभावी मूल्य ₹2,884 प्रति ग्राम पड़ा। इस लिहाज से निवेशकों को लगभग 328% का रिटर्न मिला है।
इसके अलावा, निवेशकों को सरकार की ओर से इन बॉन्ड्स पर हर साल 2.5% ब्याज भी मिलता रहा है, जो कुल मिलाकर निवेश की वास्तविक आय को और बढ़ा देता है।

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क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना को केंद्र सरकार ने 2015 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य देश में भौतिक सोने की खरीद कम करना और निवेशकों को सोने में सुरक्षित और ब्याज अर्जित करने वाला विकल्प उपलब्ध कराना है।
इस स्कीम के तहत निवेशक सोने की कीमतों से जुड़े बॉन्ड खरीद सकते हैं। बॉन्ड का प्रबंधन आरबीआई करता है और इसे भारत सरकार की ओर से गारंटी प्राप्त होती है।

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लॉक-इन और रिडेम्पशन
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कुल अवधि 8 वर्ष की होती है। हालांकि, निवेशक 5 साल बाद समय-पूर्व निकासी (early redemption) का विकल्प चुन सकते हैं।

इस दौरान बॉन्ड्स को बाजार में बेचा भी जा सकता है या बैंक और पोस्ट ऑफिस के माध्यम से रिडीम किया जा सकता है।
गोल्ड बॉन्ड क्यों बेहतर निवेश माना जाता है

  • भौतिक सोना रखने की जरूरत नहीं।
  • चोरी या खराब होने का जोखिम नहीं।
  • निश्चित वार्षिक ब्याज 2.5%।
  • पूंजीगत लाभ (Capital Gains) पर टैक्स छूट अगर बॉन्ड मैच्योरिटी तक रखा जाए।

आरबीआई और वित्त मंत्रालय के अनुसार, गोल्ड बॉन्ड स्कीम ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों के बीच खास लोकप्रियता हासिल की है और यह देश के स्वर्ण भंडारण और वित्तीय स्थिरता दोनों के लिए फायदेमंद साबित हुई है।

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