लेबर कोड बदलाव… नौकरीपेशाों की सैलरी और टैक्स प्लानिंग पर बड़ा असर

Tax Planning: नौकरीपेशा लोगों के लिए नया लेबर कोड लागू होने के बाद उनकी सैलरी और टैक्स प्लानिंग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार ने चार नए लेबर कोड लाए हैं, जिनमें वेतन संहिता (Code on Wages) सबसे अहम है। इसका सीधा असर आपकी बेसिक सैलरी, पीएफ कटौती और टैक्स बचत पर पड़ेगा।

बेसिक सैलरी का नया नियम
नए कोड के तहत अब कंपनियों को कर्मचारियों की कुल CTC का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग अलाउंस में रखना होगा। इससे पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी को 30-40% तक रखती थीं और बाकी राशि HRA, LTA जैसे अलाउंस में देती थीं। अब यह लचीलापन खत्म हो जाएगा।

टेक-होम सैलरी पर असर
बेसिक सैलरी बढ़ने से PF में कटौती बढ़ जाएगी क्योंकि PF की दर बेसिक सैलरी का 12% होती है। इसका मतलब है कि हर महीने बैंक खाते में आने वाली टेक-होम सैलरी थोड़ी कम होगी। लेकिन इसका सकारात्मक पहलू यह है कि रिटायरमेंट सेविंग्स (PF और Gratuity) अधिक मजबूत होंगी।

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टैक्स प्लानिंग की नई रणनीति
CTC में बदलाव और HRA जैसी अलाउंस में कटौती के कारण पुराने टैक्स रिजीम (Old Regime) में मिलने वाली छूट कम हो सकती है। इसलिए कर्मचारियों को यह तय करना होगा कि उन्हें पुराना या नया टैक्स रिजीम (New Regime) अपनाना चाहिए।

  • Old Regime के लिए:

* यदि आप 80C, HRA, 80D, 24(b), 80E, 80CCD(1B) जैसी टैक्स कटौतियों का लाभ लेते हैं।

* PF में बढ़ी कटौती से 80C की लिमिट आसानी से पूरी हो जाएगी।

  • New Regime के लिए:

* यदि आप कम निवेश करते हैं और ज्यादा कैश-इन-हैंड चाहते हैं।

* नई टैक्स दरें सरल हैं और निवेश या छूट की झंझट नहीं।

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कैसे चुनें सही टैक्स रिजीम

  • नए बेसिक सैलरी की गणना करें।
  • PF और अन्य अनिवार्य कटौतियों की जानकारी लें।
  • पुराने रिजीम में उपलब्ध सभी कटौतियों का अनुमान लगाएं।
  • दोनों विकल्पों में टैक्स तुलना करें।
  • जो विकल्प कुल टैक्स कम दिखाए, वही अपनाएं।

नए लेबर कोड का उद्देश्य कर्मचारियों की सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करना है। इसलिए तुरंत ज्यादा टेक-होम पाने के बजाय लंबी अवधि में लाभ को ध्यान में रखते हुए सही टैक्स रिजीम चुनना समझदारी होगी।

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