
संचार साथी ऐप पर संग्राम… विपक्ष ने लगाया ‘जासूसी तंत्र’ बनाने का आरोप, संसद में हंगामा
Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन विपक्ष के तीखे हमलों और लगातार उठते विवादों के नाम रहा। संचार साथी ऐप की अनिवार्यता, रेणुका चौधरी के बयान पर बढ़ता बवाल और दिल्ली–एनसीआर में दमघोंटू वायु प्रदूषण का मुद्दा—इन तीन मोर्चों पर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति तेज कर दी। साथ ही राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर सरकार की “ढीली नीति” पर फिर निशाना साधा।
संचार साथी ऐप को लेकर निजता पर बड़ा सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने संचार साथी ऐप को लेकर तीखी आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने दावा किया कि:
- केंद्र सरकार ने सभी मोबाइल निर्माता और आयातकों को हर स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप जबरन इंस्टॉल करने का निर्देश दिया है।
- पुराने फोन में भी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह ऐप अनिवार्य किया जाएगा।
- ऐप को फोन से न हटाया जा सकेगा, न बदला जा सकेगा।
सुरजेवाला ने कहा कि इससे सरकार:
- नागरिकों की रीयल-टाइम लोकेशन,
- कॉल और चैट,
- खरीदारी,
- फोटो और मीडिया तक पहुंच हासिल कर सकती है।
उनका सवाल था—
“अगर किसी विदेशी एजेंसी ने इस ऐप को हैक कर लिया तो क्या होगा? पूरे देश का डेटा खुला नहीं हो जाएगा?”
उन्होंने इसे नागरिकों की निजता पर भारी हमला बताते हुए सरकार से कानूनी आधार और स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
रेणुका चौधरी और ‘भौं-भौं’ विवाद
कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी का एक हालिया बयान उन पर भारी पड़ सकता है।
कुत्तों पर दिए बयान को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाए जाने की बात सामने आ रही है।
संसद की सुरक्षा व शिष्टाचार के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
विवाद तब और बढ़ गया जब आज पत्रकारों ने उनसे इस पर सवाल पूछा तो उन्होंने जवाब में भौंकने की आवाजें निकाल दीं।
सत्ता पक्ष ने इसे “गंभीर अशोभनीय आचरण” बताया है, जबकि विपक्ष इसे “अतिरिक्त प्रतिक्रिया” मानकर खारिज कर रहा है।
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प्रदूषण पर विपक्ष का प्रतीकात्मक विरोध—गैस मास्क पहनकर पहुंचे सांसद
दिल्ली–एनसीआर में खतरनाक स्तर पर पहुंचे वायु प्रदूषण को लेकर विपक्ष ने आज संसद परिसर में अनोखा प्रदर्शन किया।
कई सांसद गैस मास्क पहनकर भवन में प्रवेश करते दिखे।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा:
- “स्थिति इतनी खराब है कि लोग सांस तक नहीं ले पा रहे।”
- “मैंने वायु प्रदूषण पर कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया है।”
- “सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर एक राष्ट्रव्यापी समाधान नीति तैयार की जानी चाहिए।”
विपक्ष का कहना है कि सरकार ने प्रदूषण संकट को ‘दैनिक समस्या’ मानकर छोड़ दिया है, जबकि यह एक जनस्वास्थ्य आपातस्थिति बन चुका है।
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जाति जनगणना पर राहुल गांधी का दोबारा वार—‘योजना नहीं, मंशा नहीं’
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जाति जनगणना पर सरकार के पास:
- न समयबद्ध कार्यक्रम,
- न विधायी रोडमैप,
- न जनता से संवाद,
- और न अन्य राज्यों के सफल मॉडल से सीखने की इच्छा है।
संसद में मैंने सरकार से जाति जनगणना पर सवाल पूछा – उनका जवाब चौंकाने वाला है।
न ठोस रूपरेखा, न समयबद्ध योजना, न संसद में चर्चा, और न ही जनता से संवाद।
दूसरे राज्यों की सफल जाति जनगणनाओं की रणनीति से सीखने की कोई इच्छा भी नहीं।
मोदी सरकार की यह जाति जनगणना देश के बहुजनों के साथ… pic.twitter.com/UW1rxMJFVI
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 3, 2025
उन्होंने कहा,
“यह बहुजनों के अधिकारों के प्रति सरकार की उदासीनता का स्पष्ट प्रमाण है।”
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