SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त… BLO की मौतों पर जताई चिंता, राज्यों को दिए ये आदेश

Supreme Court on SIR: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मौतों और अत्यधिक काम के बोझ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकारें पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करें, ताकि BLO की कार्यस्थिति बेहतर हो सके और उन पर अनावश्यक दबाव न बने।

SC का आदेश… कर्मचारी बढ़ाएं, काम के घंटे घटाएं
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमेल्य बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि राज्यों को SIR प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की पूरी स्वतंत्रता है। न्यायालय ने कहा कि यदि 10,000 कर्मचारियों की जरूरत है, तो राज्य चाहें तो 20,000 या 30,000 तक स्टाफ बढ़ा सकते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि—

  • जिन कर्मचारियों को किसी व्यक्तिगत कारण से राहत चाहिए, उनके मामलों पर प्राथमिकता से विचार किया जाए।
  • यदि कोई कर्मचारी बीमार या असमर्थ है, तो उसकी जगह तुरंत दूसरा कर्मचारी नियुक्त किया जाए।
  • जरूरत पड़ने पर प्रभावित व्यक्ति अदालत में भी आ सकता है।

याचिकाकर्ता का दावा— 35–40 BLO की मौतें
यह याचिका राजनीतिक दल TVK ने दायर की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद 35 से 40 BLO की मौतें हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि BLO को लक्ष्य पूरा न करने पर नोटिस और कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है, जबकि अधिकांश BLO शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सीमित संसाधनों वाले कर्मचारी हैं।

“क्या इन कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?”
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत से कहा कि कई BLO के परिवार शोक में हैं, कुछ बच्चे अनाथ हो गए हैं और कई कर्मचारी मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह के संवेदनशील कर्मचारियों को मुकदमे की धमकी देना उचित है?

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चुनाव आयोग की दलील और कोर्ट की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने कहा कि BLO को 30 दिन में 1,200 फॉर्म भरने होते हैं, जो किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं है।
इस पर CJI ने सवाल उठाया—
“क्या रोज 10 फॉर्म भरना ही बोझ है?”

लेकिन वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि वास्तविकता में BLO को 40 फॉर्म प्रतिदिन भरने पड़ते हैं और कई बार उन्हें ऊंची इमारतों के अलग-अलग फ्लोर पर जाकर जानकारी जुटानी पड़ती है, जो बेहद मेहनत का काम है।

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राज्यों पर बढ़ी जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्यों पर यह जिम्मेदारी है कि SIR प्रक्रिया को व्यवस्थित, मानवीय और पारदर्शी तरीके से चलाया जाए।
विशेष रूप से BLO की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य की स्थिति में सुधार लाने के कदम तुरंत उठाने होंगे।

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