‘गलतफहमी में न रहें…’ पुतिन के दौरे पर थरूर की बड़ी टिप्पणी, अमेरिका-चीन को सुनाई खरी-खोटी

Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों भारत के दो दिवसीय औपचारिक दौरे पर हैं। गुरुवार को पुतिन के दिल्ली पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पालम एयरपोर्ट पर पारंपरिक गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भगवद गीता का रूसी अनुवाद भेंट किया, जिसे कूटनीतिक प्रतीकवाद के रूप में देखा जा रहा है। भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव को यह उपहार और भी मजबूत करता है।

वैश्विक परिदृश्य में पुतिन का दौरा क्यों महत्वपूर्ण?
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय माहौल उथल-पुथल और अस्थिरता से भरा हुआ है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी देशों के साथ रूस की तनातनी, पश्चिम-एशिया में तनाव, और एशिया में बदलते शक्ति समीकरणों के बीच पुतिन का यह दौरा भारत और रूस दोनों के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत अहम माना जा रहा है। भारत लंबे समय से रूस को अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में गिनता रहा है, और यह दौरा उसी विश्वास की फिर से पुष्टि करता है।

शशि थरूर ने की पुतिन और रूस-भारत संबंधों की खुलकर तारीफ
इस बीच कांग्रेस सांसद और भारत के अनुभवी राजनयिक शशि थरूर ने मीडिया से बात करते हुए रूस-भारत संबंधों की मजबूती को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई रिश्ते अनिश्चितता और तनाव के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन रूस उन देशों में से एक है जिसने हमेशा भारत का साथ दिया है।

थरूर ने कहा,
“तेल और गैस से लेकर डिफेंस इक्विपमेंट तक, रूस भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। हमारे रूस के साथ संबंध अमेरिका और चीन के साथ संबंधों से बिल्कुल अलग हैं—अलग प्रकृति, अलग भरोसा और अलग ऐतिहासिक गहराई।”

रूस की दोस्ती की ‘कीमत’ हाल के वर्षों में साबित हुई: थरूर
उन्होंने बताया कि रूस के साथ भारत की साझेदारी सिर्फ भावनात्मक या ऐतिहासिक आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक लाभ और ठोस रणनीतिक सहयोग पर आधारित है।

भारत को रूस से लगातार सस्ते दाम पर तेल और गैस प्राप्त होता रहा है, जिसने वैश्विक संकट के समय भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाई।

रक्षा क्षेत्र में रूस की भूमिका भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत की सेना के मौजूदा हथियारों और प्लेटफॉर्म्स में बड़ा हिस्सा रूस से आया है।

थरूर ने एक महत्वपूर्ण उदाहरण देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूस के S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने कई पाकिस्तानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर भारत की रक्षा की। इससे यह स्पष्ट है कि रूस की तकनीक और सहयोग आज भी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए निर्णायक महत्व रखता है।

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भारत की विदेश नीति: स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी सर्वोपरि
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति किसी एक ध्रुव के साथ खड़े होने पर नहीं टिकी, बल्कि सॉवरेन ऑटोनॉमी और इंडिपेंडेंट बाइलेटरल रिलेशनशिप्स इसके मूल विचार हैं।

उन्होंने कहा:
“किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि रूस के साथ हमारे घनिष्ठ रिश्तों का असर हमारे अमेरिका या चीन के साथ संबंधों पर पड़ेगा। भारत ने हमेशा स्वतंत्र विदेश नीति और अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। यह हमारे DNA में है।”

भारत लंबे समय से बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करता रहा है, और पुतिन का यह दौरा उसी सिद्धांत को और मजबूत करता है कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र निर्णय लेने वाला वैश्विक खिलाड़ी है।

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दौरे से क्या उम्मीदें हैं?
इस उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा सहयोग, रक्षा आयात, तकनीकी हस्तांतरण, परमाणु ऊर्जा परियोजनाएँ, व्यापार और भू-राजनीतिक मुद्दों पर कई समझौते और चर्चाएँ होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत-रूस साझेदारी को नए युग में ढालने की दिशा में एक बड़ी कड़ी साबित होगा।

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