
बच्चों में तेजी से बढ़ी रही मायोपिया की समस्या, स्क्रीन टाइम और बंद कमरें है जिम्मेदार
Sitapur Eye Hospital: क्या आपके बच्चे भी खुले आसमान को निहारना भूल गए हैं? आजकल के बच्चों का ज्यादातर समय बंद कमरों में मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीतता है। यह आदत उनकी आंखों के लिए गंभीर खतरा बन रही है। हाल ही में सीतापुर आई हॉस्पिटल के डॉ. वंदना गंगवार, डॉ. माधवी मिश्रा और डॉ. अभिषेक त्रिपाठी द्वारा किए गए शोध में यह सामने आया है कि अब 3 से 5 साल के बच्चों में भी मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) तेजी से बढ़ रहा है।
मोबाइल और स्क्रीन बच्चों की आंखों के दुश्मन
डॉ. वंदना गंगवार के अनुसार, मानव मस्तिष्क उन गतिविधियों को आत्मसात कर लेता है, जो शरीर करता है। लंबे समय तक केवल स्क्रीन पर देखने से मस्तिष्क आंखों को लंबी दूरी देखने की आदत नहीं देता। परिणामस्वरूप, बच्चे कमरे की सीमित ऊंचाई (10–12 फीट) तक ही देखने के अभ्यस्त हो जाते हैं और उनकी आंखें दूर की वस्तुएं पहचानने में असमर्थ हो जाती हैं।

“अगर बच्चे खुले आसमान में खेलें और दूर की वस्तुओं को देखें, तो आंखों की मांसपेशियों को सही व्यायाम मिलता है। वहीं, लंबे समय तक मोबाइल या टीवी देखने से आंखों की लोच और दृष्टि कमजोर हो जाती है।“ — डॉ. वंदना गंगवार
दवा से ज्यादा जरूरी है अभ्यास
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. नवनीत छाबड़ा के अनुसार, मायोपिया का इलाज केवल विटामिन या दवा से संभव नहीं है। बच्चों को नियमित रूप से लंबी दूरी की वस्तुओं को देखने का अभ्यास करना चाहिए।
- रात में चांदनी में तारों को तलाशना
- ऊँचे स्थानों पर गेंद उछालकर पकड़ने के खेल
- खुले मैदान में खेलना
इन गतिविधियों से आंखों को सही व्यायाम मिलता है और दूर की वस्तुओं को देखने की क्षमता विकसित होती है।
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माता-पिता के लिए जरूरी सुझाव
- बच्चों को दूर की वस्तुएं पहचानने के लिए प्रोत्साहित करें।
2. मोबाइल, टीवी और टैबलेट का उपयोग सीमित करें।
3. रोजाना 1–2 घंटे बाहर खेलने के लिए बच्चों को प्रेरित करें।
4. बच्चों को आसमान की ओर देखने और गेंद उछालने जैसी गतिविधियों में शामिल करें।
समय-समय पर नेत्र जांच कराएं, खासकर 3–5 साल के बच्चों के लिए।
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क्या कहता है शोध?
शोध में यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों की आंखों की सेहत के लिए खुला आसमान, प्राकृतिक रोशनी और दूर देखने का अभ्यास सबसे प्रभावी उपाय हैं। स्क्रीन टाइम और बंद कमरे की आदतें बच्चों में मायोपिया की समस्या को तेजी से बढ़ा रही हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों की आंखों की सुरक्षा के लिए व्यायाम, प्राकृतिक रोशनी और डिजिटल डिवाइस पर नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
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