कफ सिरप तस्करी मामले में एक्शन; आरोपी शुभम और विकास के खिलाफ NBW जारी

UP Cough Syrup Case: यूपी में फर्जी कफ सिरप की अवैध तस्करी मामले में आरोपियों पर एक्शन तेज हो रहा है. लखनऊ जिला अदालत ने दो मुख्य आरोपियों शुभम जायसवाल और विकास सिंह नर्वे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है.

UP Cough Syrup Case: फर्जी कफ सिरप मामले में लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में एफआईआर दर्ज है. दोनों आरोपी लंबे समय से फरार हैं.जांच एजेंसियों के अनुसार, विकास सिंह नर्वे तस्करी के लिए 27 फर्जी फर्मों का संचालन कर रहा था.

एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दबिश तेज कर दी गई है. दोनों आरोपी इस तस्करी नेटवर्क के प्रमुख कड़ियों में शामिल बताए जा रहे हैं.

​गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं. अधिकारियों का मानना है, कि इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है.

कब सामने आया मामला: ​पुलिस इंस्पेक्टर सुशांत गोल्फ सिटी उपेंद्र सिंह ने बताया कि फरवरी 2024 में सुशांत गोल्फ सिटी थाने में प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप की भारी मात्रा पकड़े जाने के बाद यह मामला सामने आना शुरू हुआ.

तब यह पता चला कि शुभम जायसवाल और विकास सिंह नर्वे उस नेटवर्क से जुड़े थे, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और बांग्लादेश तक कफ सिरप नेटवर्क को संचालित करते हैं. यह लोग करीब 200 करोड़ रुपए के कफ सिरप रैकेट मुख्य अभियुक्त हैं.

इंस्पेक्टर ने बताया कि फरवरी 2024 में दर्ज एफआईआर की विवेचना के दौरान शुभम जायसवाल और विकास सिंह नर्वे की संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं. पुलिस ने पर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए कोर्ट से एनबीडब्ल्यू की मांग की, जिसे स्वीकार कर लिया गया.

फर्जी कंपनी के सहारे तस्करी:​ ​जांच एजेंसियों के अनुसार, आजमगढ़ निवासी विकास सिंह नर्वे अवैध कफ सिरप तस्करी नेटवर्क का मुख्य ऑपरेटर बनकर उभरा है. जांच में खुलासा हुआ है, कि विकास सिंह नर्वे ने तस्करी को वैध कारोबार दिखाने के लिए 27 फर्जी फर्म्स खोल रखी थी.

इन फर्जी फर्म्स का इस्तेमाल कफ सिरप की अवैध खरीद, बिक्री और सप्लाई के लिए किया जाता था. फर्जी ई-वे बिल और ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों के सहारे कफ सिरप की खेप विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों तक भेजी जाती थी.

जैसे ही इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल फरार हुआ, विकास सिंह नर्वे भी तुरंत अंडरग्राउंड हो गया. अब तक इस मामले में एसटीएफ ने सहारनपुर के विभोर राणा और विशाल सिंह, बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह और अमित सिंह टाटा को गिरफ्तार किया है.

ED की जांच में कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी के सरगना शुभम जायसवाल के ठिकानों से 189 फर्मों के दस्तावेज मिले है। इसी तरह शुभम के सीए विष्णु अग्रवाल के ठिकाने से 140 कंपनियों के रेकॉर्ड मिले हैं। ये कंपनियां लेन-देन वैध दिखाने और दवाओं की हेराफेरी के लिए बनाई गई थी।

STF को भी मिले फर्जीवाड़े के साक्ष्य
बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह व अमित सिंह टाटा को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही एसटीएफ की टीम को बोगस फर्मों से जुड़े कई अहम साक्ष्य मिले है। सूत्रों के मुताबिक आरोपितों ने पूछताछ के दौरान फर्जीवाड़े व मनी ट्रेल से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी है।

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