‘अटल संस्मरण’ में दावा… वाजपेयी ने राष्ट्रपति पद के लिए कलाम नहीं, खुद को माना था अनुपयुक्त

Atal Sansmaran: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से जुड़ी कई अनकही बातें और राजनीतिक निर्णय उनकी मीडिया टीम के सदस्य अशोक टंडन की नई किताब ‘अटल संस्मरण’ में सामने आई हैं। किताब में दावा किया गया है कि एपीजे अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति बनने से पहले भाजपा ने वाजपेयी को राष्ट्रपति पद पर भेजने और लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने का सुझाव दिया था।

वाजपेयी ने प्रस्ताव को सिरे से किया खारिज
अशोक टंडन के अनुसार, वाजपेयी का मानना था कि किसी लोकप्रिय प्रधानमंत्री का बहुमत के आधार पर राष्ट्रपति बनना भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा,

“यह एक बेहद गलत परंपरा स्थापित करेगा और मैं ऐसे किसी कदम का समर्थन करने वाला आखिरी व्यक्ति रहूंगा।”

इसके बाद वाजपेयी ने राष्ट्रपति पद के लिए सर्वसम्मति बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के शीर्ष नेताओं — सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी और डॉ. मनमोहन सिंह — को बातचीत के लिए आमंत्रित किया।

एपीजे अब्दुल कलाम का चयन
किताब के अनुसार, वाजपेयी ने बैठक में आधिकारिक रूप से NDA द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव रखा। बैठक में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया, जिसके बाद सोनिया गांधी ने कहा कि वे इस चयन से हैरान हैं लेकिन इसे समर्थन देने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

इसके बाद 2002 में एपीजे अब्दुल कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति बने और 2007 तक इस पद को संभाला।

वाजपेयी और आडवाणी की अटूट दोस्ती
किताब में वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के संबंधों का भी उल्लेख है। टंडन के अनुसार,

आडवाणी हमेशा वाजपेयी को ‘मेरे नेता और प्रेरणा स्रोत’ कहते थे।

वाजपेयी उन्हें अपना ‘अटूट साथी’ मानते थे।

इस जोड़ी ने BJP और सरकार दोनों को नई दिशा दी और भारतीय राजनीति में सहयोग और संतुलन का प्रतीक बनी।

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संसद हमले का जिक्र
किताब में 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले का भी उल्लेख है। उस दिन वाजपेयी अपने आवास पर थे और टीवी पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई देख रहे थे। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का फोन आया और सुरक्षा की चिंता जताई। वाजपेयी ने कहा,

“सोनिया जी, मैं सुरक्षित हूं। मुझे चिंता थी कि आप संसद भवन में ना हों। अपना ख्याल रखिए।”

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क्या कहता है दस्तावेज़?
अशोक टंडन की किताब ‘अटल संस्मरण’ न केवल वाजपेयी के नेतृत्व और दूरदर्शिता को उजागर करती है, बल्कि भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण निर्णयों और संवेदनशील परिस्थितियों के पीछे की कहानी भी सामने लाती है।

किताब में वाजपेयी के सुरक्षा, नीति और पारिवारिक संबंधों से जुड़े कई अनकहे किस्से भी शामिल हैं, जो उनके व्यक्तित्व और राजनीति के संतुलन को दर्शाते हैं।

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