अजमेर शरीफ पर PM Modi द्वारा भेजी गई चादर चढ़ाने पर रोक की मांग, SC ने ठुकराई याचिका

PM Modi: अजमेर शरीफ दरगाह में पीएम मोदी को चादर चढ़ाने से रोकने के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई, लेकिन सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने इसपर तुरंत सुनवाई से मना कर दिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू चादर चढ़ा भी आए।

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह के लिए चादर भेजी जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की कोर्ट में यह याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर तत्काल सुनवाई करने की मांग को बेंच ने खारिज कर दिया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीकी ओर से ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह चादर चढ़ाने के लिए भेजी गई है।

संकट मोचन मंदिर को लेकर अर्जी

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में एक याचिका दर्ज करके पीएम मोदी की ओर से अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाए जाने से रोकने की मांग की गई। याचिकाकर्ता अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई चाहता था। याचिकाकर्ता ने सीजेआई की बेंच से कहा, ‘हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अजमेर दरगाह में चादर चढ़ाने पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। संकट मोचन मंदिर को लेकर हमारी याचिका अभी लंबित है।’ हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। कोर्ट ने कहा, ‘आज लिस्टिंग नहीं होगी।’

इस मामले पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आज इस पर सुनवाई नहीं हो सकती है। पूर्व में भी प्रधानमंत्रियों की तरफ से अजमेर दरगाह के लिए चादर भेजी जाती रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उस परंपरा को बनाए रखा है। अजमेर की कोर्ट में भी ऐसी ही एक अर्जी दाखिल की गई थी।

यह याचिका हिंदू सेवा के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से दाखिल की गई है। वह उस मुकदमे में भी एक पक्ष रहे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह को हिंदू मंदिर तोड़कर बनाया गया। गुप्ता की दलील है कि केंद्र की ओर से एक विवादित ढांचे पर चादर को चढ़ाने के लिए भेजना गलत है। ऐसा करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसा है। इससे फेयर ट्रायल का अधिकार भी खत्म होता है। वो भी तब ट्रायल कोर्ट में इस संबंध में मामला लंबित है।

 

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