PM मोदी संग प्रियंका गांधी की चाय पर बवाल, CPM सांसद ब्रिटास का तीखा हमला

I.N.D.I.A. Alliance:  कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा स्पीकर के साथ चाय बैठक में शामिल होने को लेकर इंडिया गठबंधन के भीतर असहमति तेज हो गई है। वामपंथी दल CPI(M) ने इस कदम को विपक्ष के साझा राजनीतिक रुख के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि प्रियंका गांधी की मौजूदगी विपक्ष की सामूहिक रणनीति और नैतिक स्थिति के विपरीत है। उन्होंने इसे “भारतीय लोकतंत्र पर काला धब्बा” करार देते हुए कहा कि जब सरकार की नीतियों से करोड़ों गरीब प्रभावित हो रहे हों, तब सत्ता पक्ष के साथ चाय पर बैठना बेहद गलत संदेश देता है।

‘50 करोड़ गरीबों की आजीविका दांव पर’
जॉन ब्रिटास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस कानून को लेकर विपक्ष विरोध कर रहा है, वह लगभग 50 करोड़ गरीब लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मनरेगा जैसी रोजगार गारंटी योजनाओं को कमजोर किया है, जिससे गरीब और हाशिए पर खड़े वर्गों का संकट बढ़ा है। ऐसे समय में राजनीतिक सौहार्द का प्रदर्शन आम जनता को भ्रमित करता है।

बहिष्कार के बीच उपस्थिति पर सवाल
सीपीएम सांसद ने सवाल उठाया कि जब कई विपक्षी दलों ने चाय बैठक का बहिष्कार किया, तब प्रियंका गांधी किस हैसियत से वहां मौजूद थीं, खासकर तब जब वे कांग्रेस संसदीय दल में कोई औपचारिक पद नहीं संभालतीं। उनके मुताबिक, यह कदम विपक्षी एकता को कमजोर करता है और सरकार को राजनीतिक बढ़त देता है।

यह भी पढ़ें…

अजमेर शरीफ पर PM Modi द्वारा भेजी गई चादर चढ़ाने पर रोक की मांग, SC ने ठुकराई याचिका

DMK, सपा और AAP का बहिष्कार
ब्रिटास ने कहा कि DMK के वरिष्ठ नेता टी.आर. बालू और कनिमोझी भी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने भी बैठक से दूरी बनाए रखी। उन्होंने मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रियंका गांधी से इन मुद्दों पर तीखे सवाल क्यों नहीं पूछे जा रहे।

VBGRG बिल पर तीखा हमला
सीपीएम सांसद ने VBGRG बिल को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि इसे संसद में पर्याप्त चर्चा के बिना जल्दबाजी में पारित किया गया। उनका आरोप है कि यह संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है और गरीब तबके पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में भी बोफोर्स जैसे विवादित मुद्दे पर संसद में खुली बहस हुई थी।

यह भी पढ़ें…

Air India Flight: हवा में अटकी 335 यात्रियों की जान, टेकऑफ करते ही इमरजेंसी लैंडिंग…

प्रियंका गांधी पर दोहरे रवैये का आरोप
ब्रिटास ने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी हाल के दिनों में प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की सराहना कर चुकी हैं, लेकिन अपने लोकसभा क्षेत्र वायनाड में आपदा प्रभावित लोगों के मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर मुखर नहीं रहीं। उनके मुताबिक, ऐसे विरोधाभासी रुख से विपक्ष की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

इस पूरे विवाद ने इंडिया गठबंधन के भीतर रणनीति और समन्वय को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां वाम दल विपक्ष की सख्त एकजुटता पर जोर दे रहे हैं, वहीं प्रियंका गांधी की चाय बैठक में मौजूदगी को लेकर राजनीतिक संदेश और विपक्षी तालमेल पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह भी पढ़ें…

Berlin में राहुल गाँधी के निशाने पर भागवत… बोले- RSS सत्य नहीं, शक्ति पर जोर देती है

Back to top button