
UP में निवेश को बढ़ावा… टाटा संस और सिफी टेक्नोलॉजीज़ ने CM योगी से की मुलाकात
UP News: दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य में नई उम्मीदें जगी हैं। देश के दो बड़े औद्योगिक समूह टाटा संस और सिफी टेक्नोलॉजीज़ के शीर्ष नेतृत्व ने राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और राज्य में निवेश बढ़ाने के संकेत दिए।
टाटा संस की योजनाएँ
- AI सिटी: लखनऊ में एआई सिटी विकसित करने का प्रस्ताव, जिससे उत्तर प्रदेश को वैश्विक AI केंद्र बनाया जा सके।
- TCS इकाइयों का विस्तार: लखनऊ और नोएडा स्थित इकाइयों में कार्यबल को 16,000 से बढ़ाकर 30,000 करने की योजना।
- पर्यटन और होटल निवेश: ताज, विवांता और सिलेक्शंस ब्रांड के तहत 30 नए होटल।
- ऊर्जा और नवीकरणीय परियोजनाएँ: प्रयागराज में बारा थर्मल प्लांट (1,900 मेगावाट) और बुंदेलखंड व प्रयागराज में सोलर प्रोजेक्ट्स।
- गोरखपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: IIT कानपुर के सहयोग से AI, ड्रोन और 3D प्रिंटिंग प्रशिक्षण।
- अयोध्या म्यूजियम ऑफ टेंपल परियोजना पर चर्चा।
सिफी टेक्नोलॉजीज़ का निवेश
- लखनऊ और नोएडा में पिछले पांच वर्षों में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश।
- अगले तीन वर्षों में निवेश को दोगुना करने की योजना।
- लखनऊ में AI एज डेटा सेंटर और नोएडा में हाइपरस्केल AI कैंपस।
- पहला ग्रीन हाइपरस्केल डेटा सेंटर नोएडा-01 में 100 से अधिक एंटरप्राइज और सरकारी ग्राहकों को सेवाएं।
- लखनऊ और नोएडा के AI क्लस्टर्स को भविष्य में राष्ट्रीय फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञ मानते हैं कि योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में व्यापार और निवेश का माहौल बदला है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अटल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में प्रोफेसर डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी के अनुसार, विकास की असली शुरुआत उद्घाटन से नहीं बल्कि विश्वास से होती है चाहे वह नागरिकों की सुरक्षा हो या निवेशकों का नीतिगत भरोसा।
- विश्वसनीय पुलिसिंग और स्थिर नीतियां निवेश को आकर्षित करती हैं।
- प्रस्तावित टाटा AI सेंटर राज्य को तकनीकी और औद्योगिक पहचान देगा और उच्च-कौशल नौकरियों तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती देगा।
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पिछली सरकार का अनुभव
उद्योगों का पिछला अनुभव भी इस बदलाव को रेखांकित करता है। 1992 में टाटा मोटर्स ने लखनऊ में प्लांट लगाया था, उस समय राज्य में भाजपा सरकार थी। 2006 में समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान प्लांट विस्तार पर इंसेंटिव का वादा किया गया, लेकिन इसका लाभ टाटा को नहीं मिला।
2012 में सपा की सरकार दोबारा आने पर भी पुराने वादों को लागू नहीं किया गया। इससे निराश होकर टाटा मोटर्स ने अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा उत्तराखंड स्थानांतरित कर दिया था। उद्योग जगत इसे नीति अस्थिरता का उदाहरण मानता है।
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