Ikkis: ‘मैं बच्चन नहीं नंदा हूं…’ लीगेसी के प्रेशर पर बोले अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य

Amitabh Bachchan के नाती अगस्त्य नंदा की बतौर लीड एक्टर पहली फिल्म ‘इक्कीस’ रिलीज हो गई है. इस फिल्म के रिलीज होने के बाद एक्टर से बच्चन लीगेसी के प्रेशर को लेकर पूछा गया. जिसका जवाब वायरल हो रहा है.

Agastya Nanda बॉलीवुड में कदम रख चुके हैं। उनकी फिल्म ‘इक्कीस’ (Ikkis) कुछ दिनों पहले ही सिनेमाघरों में रिलीज हुई। अभिनेता के अभिनय को भी काफी सराहा जा रहा है। इस मूवी में Agastya Nanda ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का रोल निभाया है। एक्टर भले ही अपने अभिनय के लिए तारीफें बटोर रहे हो, लेकिन उन्हें अभी भी कई बार अमिताभ बच्चन के नाती और कपूर परिवार से जोड़कर इंट्रोड्यूस किया जाता है।

अगस्त्य के ऊपर बच्चन परिवार की लीगेसी का प्रेशर?

अगस्त्य नंदा से हाल ही में परिवार के विरासत को आगे ले जाने के बारे में पूछा गया. IMDb द्वारा अपने YouTube चैनल पर शेयर किए गए एक वीडियो में इक्कीस के डायरेक्टर श्रीराम राघवन ने अगस्त्य से पूछा कि क्या “दिग्गजों” के परिवार से होने के कारण उन पर कोई दबाव है. सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए, अगस्त्य ने जवाब दिया, “मैं उस दबाव को बिल्कुल भी नहीं लेता क्योंकि मुझे पता है कि वह मेरी विरासत नहीं है. मुझे लगता है कि मेरा सरनेम नंदा है क्योंकि मैं सबसे पहले अपने पिता का बेटा हूं. मैं उन्हें गर्व महसूस कराने पर ध्यान देता हूं और यही वह विरासत है जिसे मैं बहुत गंभीरता से लेता हूं.”

‘उनके जैसा नहीं बन सकता’

आगे उन्होंने कहा, “मेरे परिवार के दूसरे सदस्य एक्टर हैं. मैं उनके काम की तारीफ करता हूं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं कभी उनके जैसा बन पाऊंगा. इसलिए इसके बारे में सोचने में समय बर्बाद करना भी बेकार है.” अगस्त्य श्वेता बच्चन और निखिल नंदा के बेटे हैं. अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के पोते हैं और अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय के भान्जे हैं.

इस मूवी ने 5 दिन में महज भारत में 21 करोड़ का कलेक्शन किया है जबकि इसका बजट 60 करोड़ है. फिल्म को मिल रहे रिस्पांस को देखकर इस फिल्म को शुरुआती दिनों में फ्लॉप ही कहा जा रहा है. श्रीराम राघवन के डायरेक्शन में बनी इक्कीस में धर्मेंद्र की आखिरी स्क्रीन अपीयरेंस है. यह सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन पर आधारित हैं. वहीं 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बसंतर की लड़ाई पर केंद्रित है.

फिल्म का टाइटल उस उम्र को बताता है जिस उम्र में अरुण खेत्रपाल शहीद हुए थे. धर्मेंद्र के साथ अगस्त्य नंदा और जयदीप अहलावत फिल्म में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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