ईरान ने मैदान में उतारे 2 करोड़ लड़ाके, क्या अमेरिका से खामेनेई को बचाएगा बासिज…

Iran America War: एक बार फिर से ईरान में प्रदर्शन कंट्रोल का जिम्मा बासिज को मिला है. वर्ष 2009 और 2022 के विरोध प्रदर्शन को भी ईरान में बासिज के लड़ाकों ने ही कुचला था. बासिज ईरान का एक अर्द्धसैनिक समूह है, जिसकी स्थापना 1979 में की गई थी. इसका मकसद ईरान में इस्लामिक सत्ता को बचा कर रखना है.

ईरान की सड़कों पर मचे बवाल को कंट्रोल करने के लिए अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार ने बासिज नामक अर्द्धसैनिक समूह को मैदान में उतार दिया है. मानवाधिकार आयोग के मुताबिक इस समूह ने ईरान में अब तक 500 दंगाईयों को मौत के घाट उतार दिए हैं. इसे ईरान का सबसे खूंखार सैन्य समूह कहा जाता है. यह एक स्वयंसेवी संस्था है, जो सरकार के खिलाफ आंतरिक बगावत को रोकने के लिए बनाया गया है.

बासिज क्या है?

बासिज एक फारसी शब्द है, जिसका मतलब होता है- लामबंदी. 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद इसका गठन किया गया था. उस वक्त इस्लामिक क्रांति के नेता अली खुमैनी का मानना था कि यह संगठन हमेशा ईरान को अमेरिका से सुरक्षित रखेगा. बासिज में ग्रामीण इस्लामिक रूढीवादी पृष्ठभूमि के लोगों को ही शामिल किया जाता है. स्थानीय स्तर पर यह संगठन मस्जिद के जरिए लोगों को नियंत्रित करता है.

बड़े पैमाने पर इस संगठन को ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड नियंत्रित करता है. इस संगठन में करीब 2 करोड़ सैनिक हैं, जिनकी उम्र 18 से 50 साल के बीच है.

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ईरान में बवाल

ईरान में 27 दिसंबर 2025 से ही महंगाई को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. यह विरोध प्रदर्शन सरकार के खिलाफ हो रहे हैं. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की जो डिमांड है वो जायज है, लेकिन कुछ दंगाईयों ने पूरे प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया है.

HRANA के मुताबिक ईरान में विरोध-प्रदर्शन को शांत करने के लिए 500 से ज्यादा नागरिकों की हत्या की गई है. वहीं ईरान में हो रहे विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है. ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान में अत्याचार जारी रहता है तो हम सैनिक भेज सकते हैं.

अमेरिका ने बासिज बल और उसके कुछ कमांडरों पर प्रतिबंध लगा रखा है. इसे अमेरिका एक खूंखार संगठन मानता है.

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