शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर बवाल; प्रयागराज मेला प्रशासन ने थमाया नोटिस

Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज माघ मेला 2025-26 के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के दिन पालकी पर बैठकर संगम स्नान करने जाने वाले ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पद को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.

मेला विकास प्राधिकरण ने रविवार को आधी रात में शंकराचार्य शिविर में नोटिस भेजा और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है. नोटिस में प्राधिकरण ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन मामले में पारित आदेश के बावजूद स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित करना न्यायालय के आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आता है.

नोटिस की वजह:

प्रयागराज मेला विकास प्राधिकरण की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि सिविल अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 में दायर अंतरिम आवेदन पर 14 अक्टूबर 2022 को सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया था कि अपील के अंतिम निस्तारण तक किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिषपीठ शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं किया जाएगा.

प्राधिकरण के अनुसार, इस मामले में अब तक कोई नया या परिवर्तित आदेश पारित नहीं हुआ है और प्रकरण अब भी न्यायालय में विचाराधीन है.

इसके बावजूद माघ मेला 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य के रूप में प्रदर्शित किया गया है.

मेला प्राधिकरण का कहना है कि यह कृत्य सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर सवाल खड़े करता है.

पत्र में मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अपेक्षा की है कि वह न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करें कि किस आधार पर वह अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं या स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य प्रचारित और प्रसारित कर रहे हैं. नोटिस के साथ शिविर में लगे बोर्ड के फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिष्यों पर बैरीकेड तोड़ने का आरोप:

मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले में पालकी रथ पर सवार होकर मौनी अमावस्या स्नान जाने से रोक दिया था. उन पर 200 अनुयायियों के साथ संगम नोज तक बिना अनुमति के पालकी पर सवार होकर संगम तक जाते समय बैरीकेडिंग तोड़ने का भी आरोप लगा था.

गौर करें कि शंकराचार्य ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि उनके साधुओं के साथ मारपीट की गई. घसीटा गया. अपमानित किया गया. अधिकारियों ने सादी वर्दी में खुद कोहनी से साधुओं को मारा. इनमें कई बाल ब्रह्मचारी साधु भी थे.

इसके बाद शंकराचार्य अपने माघ मेला के सेक्टर चार स्थित शिविर के बाहर की अनुयायियों के साथ पिछले तीन दिनों से पालकी पर ही बैठे हैं. उनका कहना है कि “मैं धरना नहीं दे रहा हूं. मैं पुलिस अभिरक्षा में हूं. पुलिसकर्मी ही मौनी आमावस्या स्नान नहीं करने दिए और पालकी घसीट कर शिवर तक लेकर आए. यही छोड़कर गए हैं. मैं यहां तब तक रहूंगा, जब तक ससम्मान प्रशासन मुझे पालकी के साथ स्नान करने की अनुमति नहीं दे देता.”

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इससे पूर्व 18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान के दिन प्रशासन ने पत्रकारों से कहा था कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नियमों का उल्लंघन किया है. बैरीकेडिंग तोड़ी है और बिना अनुमति के मौनी अमावस्या के दिन करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच पालकी से संगम नोज तक आकर अव्यवस्था फैलाई है.

प्रशासन का कहना है कि उनके अनुयायियों ने बैरीकेडिंग तोड़ी है. इसके तीसरे दिन अब मेला विकास प्राधिकरण ने भी नोटिस देकर उनके शंकराचार्य होने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके बाद इस विवाद ने और तूल पकड़ लिया है.

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