
UP में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर बवाल, सड़कों पर उतरा विरोध
UP News: उत्तर प्रदेश में अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म के नाम को लेकर ब्राह्मण समाज से जुड़े संगठनों और राजनीतिक दलों ने कड़ा ऐतराज जताया है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में फिल्म के डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
जानकारी के मुताबिक यह शिकायत मुख्यमंत्री के निर्देश पर दर्ज कराई गई। हजरतगंज कोतवाली में खुद इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने फिल्म के डायरेक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का नाम एक विशेष समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाता है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है।
प्रयागराज में विरोध प्रदर्शन, पुतला दहन
विवाद के बीच प्रयागराज में फिल्म के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने अभिनेता मनोज बाजपेयी और फिल्म के डायरेक्टर का पुतला फूंका और फिल्म के नाम को तुरंत बदलने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ‘पंडत’ शब्द को ‘घूसखोर’ जैसे नकारात्मक विशेषण से जोड़ना पूरे समुदाय का अपमान है।
सियासत गरमाई, कांग्रेस का BJP पर हमला
मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर योगी सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि
“अगर फिल्म का नाम घूसखोर पंडत है तो असल घूसखोर BJP सरकार है।”
कांग्रेस का आरोप है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला किया जा रहा है और सरकार चुनिंदा मामलों में ही सख्ती दिखा रही है।
वहीं, बीजेपी समर्थकों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि धार्मिक और जातिगत पहचान से जुड़े शब्दों का इस तरह उपयोग समाज में तनाव पैदा कर सकता है, इसलिए कार्रवाई जरूरी है।
फिल्म मेकर्स की प्रतिक्रिया का इंतज़ार
फिलहाल इस पूरे विवाद पर मनोज बाजपेयी या फिल्म के डायरेक्टर की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिल्म की रिलीज़ और भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला आगे चलकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक भावना की बहस को और तेज कर सकता है।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि फिल्मों के शीर्षक और कंटेंट को लेकर कानूनी और सामाजिक सीमाएं कहां तक होनी चाहिए।





