कानपुर में फर्जी जज बनकर ठगी… अधिवक्ता विष्णु शंकर गुप्ता की जमानत अर्जी खारिज

Kanpur News: कानपुर में फर्जी जज बनकर लोगों से ठगी करने के गंभीर मामले में फंसे अधिवक्ता विष्णु शंकर गुप्ता को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह की अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला?
पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, अधिवक्ता विष्णु शंकर गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने खुद को जज बताकर लोगों को गुमराह किया और विभिन्न मामलों में फैसले कराने या कानूनी राहत दिलाने के नाम पर उनसे ठगी की। आरोपी ने अपनी पहचान और पेशे का गलत इस्तेमाल कर कई लोगों से पैसे ऐंठे।

मामले के सामने आने के बाद कानूनी जगत में भी हड़कंप मच गया था।

कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने न्यायिक व्यवस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। फर्जी जज बनकर ठगी करना गंभीर और संगठित अपराध की श्रेणी में आता है। यही नहीं आरोपी को जमानत मिलने पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताई गई। इन दलीलों को स्वीकार करते हुए अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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बार एसोसिएशन और बार काउंसिल की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही—

  • कानपुर बार एसोसिएशन ने विष्णु शंकर गुप्ता की सदस्यता समाप्त कर दी थी
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया (नई दिल्ली) ने उन्हें एक साल के लिए डिबार कर दिया है

इसका मतलब है कि वह तय अवधि तक वकालत नहीं कर सकेंगे।

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कानूनी जगत में नाराजगी
इस घटना के बाद अधिवक्ताओं और आम लोगों में नाराजगी देखने को मिली है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह के कृत्य वकालत जैसे सम्मानित पेशे की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा किइस तरह कि घटना से आम जनता के न्याय पर भरोसे को कमजोर करता है। उन्होंने ऐसे मामलों में सख्त सजा की मांग की है।

फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी के शिकार लोगों की संख्या कितनी है और कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई। क्या आरोपी ने अकेले या किसी गिरोह के साथ मिलकर यह अपराध किया आने वाले दिनों में इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने की संभावना है।

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