
शिक्षामित्रों के हित में निर्णय लेगी सरकार… कैशलेस इलाज व मानदेय बढ़ाने पर दिया ये संकेत
UP Budget Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों राजनीतिक और जनहित के मुद्दों को लेकर काफी चर्चा में है। बुधवार को सदन में विभिन्न विषयों के साथ-साथ शिक्षामित्रों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। विपक्ष ने सरकार से शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और ग्राम पंचायतों में तैनाती को लेकर सवाल किए, जिस पर सरकार की ओर से विस्तृत जवाब दिया गया।
सदन में गूंजा शिक्षामित्रों का मुद्दा
बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने शिक्षामित्रों की स्थिति को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने पहले दिन एसआईआर और जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मुद्दों पर सदन से बहिर्गमन भी किया था। इसी क्रम में शिक्षामित्रों के मानदेय और उनकी सेवा शर्तों पर भी चर्चा हुई।
सरकार ने बताया—शिक्षामित्रों की भूमिका महत्वपूर्ण
यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विधानसभा में कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के लिए शिक्षामित्रों की सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रहे एसआईआर कार्य में शिक्षामित्र बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह कार्य पूरा होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों में तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
मंत्री ने बताया कि इस संबंध में सरकार पहले ही आदेश जारी कर चुकी है और चरणबद्ध तरीके से तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
कैशलेस इलाज की सुविधा को मंजूरी
सरकार ने शिक्षामित्रों, शिक्षकों और अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत देते हुए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी देने की बात भी कही है। इससे लाखों शिक्षाकर्मियों को स्वास्थ्य संबंधी खर्चों से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मानदेय बढ़ाने पर सरकार का पक्ष
मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के समय शिक्षामित्रों के मानदेय में कोई खास वृद्धि नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई, तब शिक्षामित्रों को 3500 रुपये मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षामित्रों के हितों को लेकर संवेदनशील है और आगे भी उनके कल्याण के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। हालांकि, मानदेय बढ़ाने को लेकर कोई ठोस समयसीमा घोषित नहीं की गई, लेकिन भविष्य में इस पर विचार करने का भरोसा दिया गया।
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विपक्ष ने किया दबाव
विपक्षी दलों ने शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सरकार से जल्द फैसला लेने की मांग की। उनका कहना था कि महंगाई के दौर में वर्तमान मानदेय पर्याप्त नहीं है और इसे बढ़ाना जरूरी है।
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शिक्षामित्रों की बढ़ीं उम्मीदें
सरकार के जवाब के बाद शिक्षामित्रों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला हो सकता है। बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा आगे भी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
यूपी की राजनीति में शिक्षामित्र लंबे समय से अहम मुद्दा रहे हैं और सरकार के हर फैसले का असर सीधे लाखों परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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