HC के आदेश के बाद यूपी में शिक्षकों पर सख्ती, फर्जी प्रमाणपत्र वालों की जाएगी नौकरी

UP News : यूपी में संदेश के घेरे में आए फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों की फिर से जांच की जाएगी। शासन ने एक माह के भीतर ऐसे अध्यापकों को चिन्हित कर एक़ माह के भीतर उसकी रिपोर्ट मांगी है।

UP News : उत्तर प्रदेश में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले सहायक शिक्षकों के खिलाफ अब बड़ा कार्रवाई अभियान शुरू होने जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की पहचान और जांच के निर्देश जारी किए हैं। शासन ने सभी मंडलों से एक महीने के भीतर संदिग्ध शिक्षकों की सूची मांगी है, जबकि पूरी जांच छह माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य तय किया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन सक्रिय

यह कार्रवाई गरिमा सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में हाईकोर्ट द्वारा 22 जनवरी को दिए गए आदेश के अनुपालन में की जा रही है। शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर तत्काल प्रभाव से जांच अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश के कई परिषदीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में ऐसे सहायक शिक्षक कार्यरत हैं जिन्होंने जाली प्रमाणपत्र, बनावटी दस्तावेज या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर नियुक्ति प्राप्त की। कई मामलों में यह भी पाया गया कि ऐसे शिक्षक वर्षों से सरकारी सेवा में बने हुए हैं।

मंडल स्तर पर होगी व्यापक जांच

शासन के निर्देश के अनुसार अब सभी मंडलों में मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक अपने-अपने क्षेत्र में नियुक्त सहायक शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराएंगे।

जांच पूरी होने के बाद एक समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें निम्न विवरण शामिल होंगे:

  • शिक्षक का नाम और नियुक्ति की तिथि

  • फर्जी या संदिग्ध पाए गए दस्तावेज

  • प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था का नाम

  • अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण

इसके बाद यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

दोषी शिक्षकों की सेवा समाप्ति और वेतन वसूली

संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दिए गए आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि:

  • फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की सेवा समाप्त की जाए

  • उनसे अब तक प्राप्त वेतन की वसूली की जाए

  • जिन अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाए

इससे पहले भी प्रदेश में कई मामलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

प्रदेश स्तर पर चलाया जाएगा विशेष अभियान

शासन का कहना है कि पहले भी कई बार जांच के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहे। यही वजह है कि इस बार पूरे प्रदेश में समन्वित और समयबद्ध जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सकेगा।

Back to top button