Iran से संपर्क मुश्किल… राज्यसभा में मिडिल ईस्ट हालात पर बोले S. Jaishankar

S. Jaishankar: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात को लेकर भारत सरकार ने गहरी चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि क्षेत्र की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और Iran की लीडरशिप से संपर्क करना फिलहाल मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा कि भारत इस संकट को लेकर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को ही सबसे प्रभावी रास्ता मानता है।

प्रधानमंत्री खुद कर रहे हैं स्थिति की निगरानी
विदेश मंत्री ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi खुद मिडिल ईस्ट के हालात पर लगातार नजर रखे हुए हैं। सरकार का मुख्य फोकस क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

एक करोड़ से अधिक भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय
एस. जयशंकर ने बताया कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने अपने दूतावासों को सतर्क रहने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं। कई देशों में भारतीय दूतावासों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नागरिकों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

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कूटनीति और संवाद से ही निकल सकता है समाधान
विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात में सैन्य कार्रवाई से स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही एकमात्र प्रभावी रास्ता है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों और संगठनों के संपर्क में है ताकि क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों को मजबूत किया जा सके।

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वैश्विक स्तर पर संपर्क बनाए हुए है भारत
एस. जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत सरकार मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर वैश्विक स्तर पर कई देशों के साथ संपर्क बनाए हुए है। भारत का प्रयास है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता को रोका जाए और शांति कायम करने के लिए सभी पक्ष मिलकर काम करें।

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर विशेष कदम भी उठाए जा सकते हैं।

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