
Iran युद्ध का असर! डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के करीब… बढ़ सकती है महंगाई
Rupee Vs US Dollar: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार को भारतीय मुद्रा रुपया अमेरिकी मुद्रा United States Dollar के मुकाबले गिरकर 93 के करीब पहुंच गया, जो अब तक के सबसे कमजोर स्तरों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि Iran से जुड़े युद्ध हालात और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ा है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और मुद्रा पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जब कच्चा तेल महंगा होता है तो भारत को आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।
क्यों कमजोर हो रहा है रुपया
अर्थशास्त्रियों के अनुसार रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण हैं:
- मध्य पूर्व में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
- वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती
- विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी
इन सभी कारणों की वजह से भारतीय मुद्रा लगातार दबाव में बनी हुई है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
रुपये की गिरावट का असर सीधे आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
- आयातित सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी की कीमत बढ़ सकती है
- हवाई यात्रा और विदेश से आने वाले सामान पर खर्च बढ़ सकता है
- महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है
यह भी पढ़ें…
Share Market: ट्रंप के नए टैरिफ से बेखौफ शेयर बाजार, अदाणी ग्रुप के शेयर चढ़े
सरकार और RBI की नजर
भारतीय रिजर्व बैंक Reserve Bank of India और सरकार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है ताकि रुपये की गिरावट को नियंत्रित किया जा सके।
यह भी पढ़ें…
Stock Market: फिर धड़ाम से गिरा शेयर बाजार, ताश के पत्तों की तरह बिखरे स्टॉक
बढ़ सकती है महंगाई?
जानकारों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि वैश्विक हालात स्थिर होने पर मुद्रा बाजार में सुधार भी देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, रुपये का डॉलर के मुकाबले 93 के करीब पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका है।
यह भी पढ़ें…





