
गैस सिलेंडर खत्म हो जाए तो क्या करें? जो आपकी रसोई बचा सकते हैं…
LPG crisis: दुनिया में कहीं भी जंग छिड़े, उसका असर सीमाओं से बाहर तक पहुंचता है। इन दिनों मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को हिला दिया है और इसका असर अब भारत की रसोई तक दिखाई देने लगा है।
LPG crisis: कई शहरों में गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगने की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि होटल और रेस्टोरेंट भी कमर्शियल गैस की कमी से जूझ रहे हैं। कुछ जगहों पर मेन्यू तक छोटा करना पड़ा है और कई किचन अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। भारत अपनी कुल LPG ज़रूरत का लगभग 60–65% हिस्सा आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित होना स्वाभाविक है। नीचे हम ऐसे विकल्प बता रहे हैं, जो आपात स्थिति में आपकी रसोई चलाने में मदद कर सकते हैं।
कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई पर दबाव
हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में करीब 60 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर और महंगे हो गए हैं। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर भी और दबाव पड़ सकता है। सरकार ने भी लोगों से अपील की है कि पैनिक बुकिंग न करें और ऊर्जा की बचत करें, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके। ऐसे हालात में सवाल उठता है अगर अचानक गैस सिलेंडर खत्म हो जाए तो खाना कैसे बनेगा?
गैस सिलेंडर न हो तो ये विकल्प आ सकते हैं काम
1. इंडक्शन कुकटॉप
शहरी घरों में गैस का सबसे लोकप्रिय विकल्प इंडक्शन कुकटॉप है। यह चुंबकीय ऊर्जा से सीधे बर्तन को गर्म करता है, जिससे खाना जल्दी पकता है और ऊर्जा की बचत भी होती है।
फायदे:
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खाना जल्दी पकता है
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सुरक्षित और फ्लेमलेस
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साफ करना आसान
कमियां:
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इंडक्शन बेस वाले बर्तन जरूरी
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बिजली के बिना नहीं चलेगा
2. इंफ्रारेड इलेक्ट्रिक स्टोव
इंफ्रारेड कॉयल से गर्मी पैदा कर यह स्टोव बर्तन को गर्म करता है।
फायदा: हर तरह के बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
कमियां: बिजली की खपत अधिक और सतह बहुत गर्म हो जाती है।
3. इलेक्ट्रिक कॉयल स्टोव (हॉट प्लेट)
यह सस्ता और सरल उपकरण है, जिसमें कॉयल गर्म होकर बर्तन को गर्म करती है।
फायदे:
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कम कीमत
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लगभग हर बर्तन के साथ काम करता है
कमियां:
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गर्म होने में समय लगता है
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बिजली ज्यादा खर्च होती है
4. इलेक्ट्रिक राइस कुकर
राइस कुकर केवल चावल के लिए ही नहीं, बल्कि दाल, सूप और करी बनाने में भी उपयोगी है।
फायदे:
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आसान और कम बिजली खर्च
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ऑटोमैटिक कुकिंग
कमियां:
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रोटी या तली हुई चीजें नहीं बनतीं
5. माइक्रोवेव ओवन
यह मुख्य रूप से खाना गर्म करने और भाप में पकाने के लिए इस्तेमाल होता है।
फायदे:
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खाना जल्दी गर्म होता है
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सब्ज़ियों को स्टीम करने में अच्छा
कमियां:
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रोटी या तली चीजें बनाना मुश्किल
6. सोलर कुकर
सूरज की रोशनी से चलने वाला यह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प है।
फायदे:
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किसी ईंधन की जरूरत नहीं
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प्रदूषण नहीं
कमियां:
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पकने में समय ज्यादा
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रात या बादल में उपयोग नहीं
7. लकड़ी का चूल्हा
ग्रामीण भारत में आज भी यह आम है और गैस संकट में एक अस्थायी समाधान बन सकता है। कोयले या चारकोल का उपयोग करके खाना पकाने की एक पारंपरिक विधि. चूल्हे में कोयले को जलाया जाता है और उसके ऊपर बर्तन रखकर खाना पकाया जाता है.
फायदे:
- कोयला आसानी से उपलब्ध है.
- ऊष्मा एक समान रहती है.
- कमियां:
- इसका धुआं लोगों को परेशान कर सकता है.
- इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है, जिससे बीमारी हो सकती है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर धीरे-धीरे भारत की ऊर्जा सप्लाई पर दिखने लगा है। ऐसे में घबराने के बजाय वैकल्पिक विकल्पों की जानकारी होना जरूरी है।अगर गैस सिलेंडर की कमी या कीमतों में बढ़ोतरी का दौर लंबा चलता है, तो इंडक्शन, इलेक्ट्रिक स्टोव या सोलर कुकर जैसे विकल्प कई घरों के लिए राहत साबित हो सकते हैं। खाना इंसान की बुनियादी जरूरत है और मुश्किल हालात में भी अगर विकल्प मौजूद हों, तो रसोई कभी बंद नहीं होती।





