Working Women के लिए राहत… दत्तक माताओं को 12 हफ्ते की छुट्टी मंजूर

Suprime Court: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को भी 12 हफ्तों का मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) दिया जाएगा—चाहे गोद लिया गया बच्चा किसी भी उम्र का क्यों न हो।

क्या है फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दत्तक माताओं को भी जैविक माताओं की तरह समान अधिकार मिलना चाहिए। अदालत ने 12 हफ्तों की मैटरनिटी लीव सभी मामलों में लागू करने का निर्देश दिया है, जिससे अब गोद लेने वाली महिलाओं को भी नवजात की देखभाल के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

समानता और अधिकारों पर जोर
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मातृत्व केवल जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे की परवरिश और देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में दत्तक माताओं को इस अधिकार से वंचित रखना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

कामकाजी महिलाओं के लिए राहत
यह फैसला खासतौर पर कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब वे बिना नौकरी की चिंता किए बच्चे को गोद लेने का निर्णय ले सकेंगी। इससे दत्तक ग्रहण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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पहले क्या स्थिति थी?
पहले कई संस्थानों में दत्तक माताओं को सीमित या बिल्कुल भी मातृत्व अवकाश नहीं दिया जाता था, या फिर बच्चे की उम्र के आधार पर अलग-अलग नियम लागू होते थे। इस फैसले के बाद पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।

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सामाजिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से समाज में दत्तक ग्रहण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी। साथ ही, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को परिवार मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि समाज में समानता और संवेदनशीलता की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।

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