अमेरिका में सियासी भूचाल! ट्रंप का बयान मना मुसीबत; जाएगी राष्ट्रपति की कुर्सी?

Donald Trump: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। ईरान के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं ने उनके खिलाफ संविधान के 25वें संशोधन को लागू करने की मांग तेज कर दी है। इस मुद्दे ने अमेरिकी राजनीति में नया भूचाल ला दिया है।


ईरान पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद

रविवार (4 अप्रैल) को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेकर कथित रूप से अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इस बयान के बाद विपक्षी दलों के कई नेता खुलकर उनके खिलाफ सामने आ गए। उनका आरोप है कि राष्ट्रपति का व्यवहार पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।


विपक्षी नेताओं का हमला

डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता बेक्का बालिंट ने कहा कि अगर ऐसा बयान बराक ओबामा या जो बाइडेन ने दिया होता तो रिपब्लिकन तत्काल उनके इस्तीफे की मांग करते।

वहीं सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि अगर वह कैबिनेट में होते तो 25वें संशोधन को लागू करने के लिए तुरंत कानूनी सलाह लेते।

इसके अलावा यास्मीन अंसारी और मेलेनी स्टांसबेरी ने भी ट्रंप के मानसिक संतुलन और निर्णय क्षमता पर सवाल उठाए हैं।


क्या है 25वां संशोधन?

अमेरिका के संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति की असमर्थता की स्थिति में सत्ता हस्तांतरण का प्रावधान देता है।

  • यदि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में अक्षम माने जाते हैं, तो कैबिनेट और उपराष्ट्रपति प्रस्ताव ला सकते हैं।
  • राष्ट्रपति अगर इसका विरोध करते हैं, तो मामला कांग्रेस में जाता है।
  • सीनेट और प्रतिनिधि सभा में 2/3 बहुमत मिलने पर राष्ट्रपति को पद छोड़ना पड़ सकता है।

जेडी वेंस बन सकते हैं राष्ट्रपति

अगर 25वां संशोधन लागू होता है, तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शेष कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद संभाल सकते हैं। यह स्थिति अमेरिकी राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।


ट्रंप पर बढ़ता दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद के बाद ट्रंप ने कुछ दिनों का ब्रेक भी लिया है, जिससे विपक्ष को और हमले का मौका मिल गया है। हालांकि व्हाइट हाउस की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


क्या वाकई हट सकते हैं ट्रंप?

विशेषज्ञों का मानना है कि 25वें संशोधन को लागू करना बेहद कठिन प्रक्रिया है और इसके लिए भारी राजनीतिक सहमति जरूरी होती है। फिलहाल यह मांग राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।

ईरान पर दिए गए बयान ने ट्रंप को नए राजनीतिक संकट में डाल दिया है। अब देखना होगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या वास्तव में अमेरिकी इतिहास में एक बड़ा संवैधानिक कदम उठाया जाता है।

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