UP News: बस्ती में दिल दहला देने वाली घटना, डिलीवरी के समय दो टुकड़ों में बंटा नवजात

UP News: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग की रूह कपा देने वाली लापरवाही सामने आई है. अस्पताल के गेट पर खड़ी एम्बुलेंस में प्रसव के दौरान नवजात का सिर धड़ से अलग हो गया.

UP News: उत्तर प्रदेश के बस्ती बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है. जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एंबुलेंस में महिला स्टाफ की लापरवाही से प्रसव के दौरान नवजात शिशु का सिर धड़ से अलग हो गया. इस मामले को दबाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फ़ानन में प्रसूता को निजी अस्पताल भेजा, लेकिन गंभीर हालत देखकर महिला को कैली अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर बच्चे का सिर निकाला.इस जघन्य मामले पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश के बाद जांच टीम ने मौके पर छानबीन शुरू कर दी है.

जांच टीम ने कब्जे में लिए दस्तावेज

डिप्टी सीएम के निर्देश पर संयुक्त निदेशक डॉ. सुशील कुमार अपनी टीम के साथ मंगलवार दोपहर बस्ती पहुंचे. जांच टीम ने सीएचसी कुदरहा और पड़ोस के निजी मैक्स अस्पताल में घंटों तक दस्तावेजों की पड़ताल की.

टीम ने उस समय ड्यूटी पर तैनात नर्सों, आशा बहू और निजी अस्पताल के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं. साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए टीम ने मैक्स अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और मरीजों से संबंधित रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिए हैं.

स्टाफ़ की लापरवाही से विभत्स हादसा

महिला के पति नीरज कुमार ने बटुआ कि वे अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर इलाज के लिए CHC कुदरहा लेकर पहुंचे थेच परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात महिला स्टाफ ने विशेषज्ञ डॉक्टर की प्रतीक्षा करने के बजाय एंबुलेंस में ही महिला को दर्द का इंजेक्शन दे दिया और जबरन नॉर्मल डिलीवरी कराने का प्रयास करने लगी. जिसके बाद ये हादसा हो गया.

महिला प्रेमा की सास शकुंतला ने बताया कि जब स्टाफ ने देखा कि बच्चे का सिर अलग हो गया है, तो उनके हाथ-पांव फूल गए. आनन-फानन में अपनी गलती छुपाने के लिए उन्होंने प्रसूता की हालत गंभीर बताते हुए उसे पास के एक निजी अस्पताल भेज दिया. निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने भी जोखिम को देखते हुए महिला को तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज कैली के लिए रेफर कर दिया.

ये भी पढ़े- ‘करप्शन करंट’ पर बड़ा झटका, बाराबंकी में रिश्वतखोरी पर गिरी गाज

दोषियों पर गिरेगी कड़ी गाज

संयुक्त निदेशक डॉ. सुशील कुमार ने इसे अत्यंत दुखद और गंभीर घटना बताया है. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या निजी स्टाफ.

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी एम्बुलेंस सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल पीड़ित महिला का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है, जहां उसकी जान तो बच गई लेकिन उसने अपना बच्चा खो दिया.

ये भी पढ़े- UP News: कमरे में छिपा था खौफनाक राज… 5 महीने से बेटी का शव घर में रखे था पिता!

Back to top button