
“बीड की चीख, गन्ना मजदूर महिलाओं की ‘खामोश’ त्रासदी”
महाराष्ट्र गन्ना मजदूर महिला गर्भाशय: महाराष्ट्र के बीड जिले से एक ऐसी सच्चाई सामने आई है जो रूह कंपा देने वाली है। गन्ने के खेतों में बिना रुके मजदूरी करने के लिए हजारों महिलाओं को अपना गर्भाशय (Uterus) निकलवाना पड़ा।
महाराष्ट्र गन्ना मजदूर महिला गर्भाशय: भारत के चीनी का कटोरा कहे जाने वाले महाराष्ट्र के पश्चिमी क्षेत्र में एक भयावह हकीकत छिपी है। यहां गन्ने की कटाई करने वाली हजारों महिलाएं ‘बिना गर्भाशय’ के जीवन जीने को मजबूर हैं। हालिया रिपोर्ट्स और सरकारी जांच समितियों के अनुसार, अकेले बीड जिले में हजारों महिलाओं ने हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) यानी गर्भाशय (Uterus) निकलवाने का ऑपरेशन कराया है, ताकि वे मासिक धर्म (Periods) के दौरान होने वाले दर्द और छुट्टी के कारण लगने वाले जुर्माने से बच सकें।
मजदूरी और मजबूरी का गणित
महाराष्ट्र में गन्ना कटाई का काम ‘जोड़ी’ (पति-पत्नी) के आधार पर होता है। ठेकेदार (मुकादम) महिलाओं को काम पर रखने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि मासिक धर्म या गर्भावस्था के दौरान काम प्रभावित होगा।
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भारी जुर्माना: यदि कोई मजदूर एक दिन की भी छुट्टी लेता है, तो उस पर ₹500 से ₹1000 तक का जुर्माना लगाया जाता है।
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अमानवीय स्थितियां: खेतों में न तो शौचालय होते हैं और न ही साफ पानी। ऐसे में सैनिटरी पैड्स बदलना या स्वच्छता बनाए रखना लगभग असंभव होता है। बार-बार होने वाले संक्रमण (Infection) से बचने के लिए महिलाएं सर्जरी का रास्ता चुनती हैं।
सरकारी आंकड़े और नीलम गोऱ्हे समिति की रिपोर्ट
महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस मामले की गहन जांच की थी। रिपोर्ट के चौंकाने वाले तथ्य इस प्रकार हैं:
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सर्वेक्षण में शामिल बीड की 13,000 से अधिक महिलाओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने गर्भाशय निकलवाया है।
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इनमें से कई महिलाओं की उम्र मात्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी।
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बीड के कुछ गांवों में 36% महिलाओं की बच्चादानी निकाली जा चुकी है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 3% है।
निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की भूमिका
जांच में यह भी पाया गया कि स्थानीय निजी डॉक्टर अक्सर छोटी-मोटी स्त्री रोगों को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। वे महिलाओं को कैंसर का डर दिखाकर सर्जरी के लिए उकसाते हैं, जिससे उन्हें मोटा मुनाफा होता है। कम उम्र में सर्जरी होने के कारण ये महिलाएं अब जोड़ों में दर्द, समय से पहले बुढ़ापा और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही हैं।
सरकार के कदम
इस मुद्दे के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने कड़े नियम लागू किए हैं:
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अब किसी भी निजी अस्पताल के लिए गर्भाशय निकालने से पहले जिला सिविल सर्जन (Civil Surgeon) की अनुमति लेना अनिवार्य है।
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गन्ना मजदूरों के लिए पहचान पत्र और स्वास्थ्य बीमा की योजनाएं शुरू की गई हैं।





