UP News: स्मार्ट मीटर विवाद ने बढ़ाई ऊर्जा मंत्री AK शर्मा की मुश्किलें, जा सकती है कुर्सी!

UP Smart Meter Protest: यूपी कैबिनेट विस्तार की खबरों के बीच ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के विभाग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जानें क्यों स्मार्ट मीटर विवाद बना उनकी कुर्सी के लिए खतरा।

UP Smart Meter Protest: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश में जल्द होने वाले संभावित मंत्रिमंडल विस्तार (UP Cabinet Expansion) को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। सूत्रों के मुताबिक, स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter Row) को लेकर जनता में उपजे भारी आक्रोश का खामियाजा ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (AK Sharma) को भुगतना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इस विवाद के बाद उनसे ऊर्जा विभाग छीना जा सकता है।

स्मार्ट मीटर विवाद; क्यों निशाने पर आए एके शर्मा?

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों ने सरकार की काफी किरकिरी कराई है। इस योजना के खिलाफ जनता के गुस्से ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। यहाँ उन 5 मुख्य कारणों का विवरण है जिसने मंत्री की कुर्सी को खतरे में डाल दिया है:

  1. बिना सहमति प्रीपेड कन्वर्जन: प्रदेश के लगभग 82 लाख उपभोक्ताओं के पोस्टपेड मीटरों को उनकी मर्जी के बिना अचानक प्रीपेड में बदल दिया गया।

  2. तकनीकी खामियां और ‘ब्लैकआउट’: तकनीकी खराबी के चलते करीब 5 लाख घरों की बत्ती ‘निगेटिव बैलेंस’ दिखाकर काट दी गई, जिससे जनता में त्राहि-त्राहि मच गई।

  3. ‘स्मार्ट चीटर’ की छवि: सोशल मीडिया पर ‘तेज भागते मीटरों’ के वीडियो वायरल हुए, जिससे विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।

  4. शिकायत तंत्र की विफलता: हेल्पलाइन 1912 पर दर्ज शिकायतों का समाधान न होना और उपभोक्ताओं की सुनवाई न होने से असंतोष बढ़ा।

  5. RSS और भाजपा का फीडबैक: संघ और स्थानीय भाजपा नेताओं ने रिपोर्ट दी है कि स्मार्ट मीटर विवाद के कारण आगामी चुनावों में पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है।

अखिलेश यादव और विपक्ष का हमला

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की तुलना ‘EVM स्कैम’ से करते हुए इसे जनता की जेब पर डाका बताया है। विपक्ष के बढ़ते दबाव और जनता के सड़कों पर उतरने के बाद सरकार को इस योजना पर ‘यू-टर्न’ लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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हाल ही में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने ‘उपभोक्ता देवो भव:’ का नारा देते हुए प्रीपेड सिस्टम को फिलहाल रोकने और बकाया बिल किस्तों में जमा करने की घोषणा की है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह डैमेज कंट्रोल काफी नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित कैबिनेट फेरबदल में एके शर्मा का विभाग बदला जाना लगभग तय माना जा रहा है।

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