
भारत की पहली Hydrogen Train लॉन्च, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी; किराया सिर्फ ₹5
India First Hydrogen Train Launch: पीएम नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Namo Green Rail) को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन का किराया बेहद किफायती है।
India First Hydrogen Train Launch: भारतीय रेलवे ने आज एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन ‘नमो ग्रीन रेल’ (Namo Green Rail) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology) से तैयार भारत की पहली पर्यावरण-अनुकूल ट्रेन है। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जैसे जर्मनी, चीन, अमेरिका) के एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक मौजूद है।
प्लेटफॉर्म टिकट से भी सस्ता किराया
इस आधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत आम जनता के लिए इसका बेहद किफायती किराया और पर्यावरण के अनुकूल होना है। जहां आज के समय में देश के कई बड़े स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत भी काफी अधिक होती है, वहीं इस हाई-टेक हाइड्रोजन ट्रेन का शुरुआती किराया मात्र ₹5 तय किया गया है, जो यात्रा की दूरी के हिसाब से अधिकतम ₹25 तक जाता है।
धुएं की जगह सिर्फ निकलेगा पानी
इसके साथ ही यह ट्रेन पूरी तरह से ‘जीरो एमिशन’ यानी शून्य कार्बन उत्सर्जन के सिद्धांत पर काम करती है। पारंपरिक डीजल इंजनों की तरह यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली हानिकारक गैसें नहीं छोड़ती है। इसमें इस्तेमाल की गई आधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक के कारण यह ट्रेन हवा में जहरीले धुएं के बजाय केवल पानी की भाप (Water Vapour) छोड़ती है, जिससे प्रदूषण का स्तर बिल्कुल शून्य रहता है।
जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ेगी
यह ट्रेन संचालन और यात्रियों की क्षमता के मामले में भी काफी बेमिसाल है। 10 कोच वाली यह विशेष ट्रेन रोजाना हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। अपने सफर के दौरान यह ट्रेन रास्ते में कुल 11 स्टेशनों पर रुकेगी और प्रतिदिन लगभग 2,600 यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी।
बिजली के तारों के दौड़ेगी यह ट्रेन
दिलचस्प बात यह है कि इस ट्रेन को चलाने के लिए पटरियों के ऊपर महंगे बिजली के तारों (Overhead Electrification) के जाल की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि यह अपने भीतर मौजूद ईंधन से खुद ही बिजली पैदा करती है। वहीं सुरक्षा के लिहाज से भी ट्रेन में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है; इसमें विशेष मल्टी-लेयर डिटेक्टर लगाए गए हैं, जो किसी भी प्रकार के हाइड्रोजन लीक, आग या धुएं का तुरंत पता लगाकर किसी भी बड़े हादसे को रोकने में सक्षम हैं।





