UP News: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले लॉ के दो छात्र निलंबित, हॉस्टल से भी निकाला

सुप्रीम कोर्ट में जजों से अभद्रता करने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के दो लॉ छात्रों को निलंबित कर हॉस्टल से निकाल दिया गया है।

Lucknow News: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के भीतर सुनवाई के दौरान जजों से अभद्रता करने, फाइलें हवा में उछालने और न्यायिक कार्य में बाधा डालने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) के दो विधि (Law) छात्रों पर विवि प्रशासन ने गाज गिराई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों आरोपी छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उनके हॉस्टल का आवंटन रद्द करते हुए परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी है।

यह कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई विश्वविद्यालय द्वारा गठित अनुशासन समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोनों छात्रों से तीन कार्य दिवसों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 में सुनवाई के दौरान हुआ था। एलएलबी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम के छात्र प्रबल प्रताप सिंह (5वां सेमेस्टर) और चंद्र भान (3रा सेमेस्टर) एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) के सिलसिले में व्यक्तिगत रूप से जजों के समक्ष पेश हुए थे।

सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप सिंह ने पीठ के साथ तीखी बहस की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। जब पीठ ने उनके रवैये पर सवाल उठाया, तो उन्होंने कागजातों की फाइल हवा में उछाल दी और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं।

कोर्ट रूम में हंगामा बढ़ता देख जब वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें शांत कराने और बाहर ले जाने की कोशिश की, तो छात्रों ने ऑन-ड्यूटी सुरक्षा कर्मचारियों के साथ भी हाथापाई और धक्का-मुक्की की।

दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार

सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों की तहरीर पर दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में दोनों छात्रों के खिलाफ बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपी छात्रों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए दोनों छात्रों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है। उनके हॉस्टल कमरे रद्द कर दिए गए हैं और जांच पूरी होने तक उनके कैंपस में प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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