
GST ट्रिब्यूनल को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा सवाल, इंदौर में राज्यपीठ नहीं बनने पर केंद्र-राज्य को नोटिस…
MP News: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े व्यावसायिक शहर इंदौर में अब तक जीएसटी अपीलीय अधिकरण (GST Appellate Tribunal) की राज्यपीठ स्थापित नहीं किए जाने के मामले ने कानूनी और प्रशासनिक बहस को तेज कर दिया है। इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि जब इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा कारोबारी केंद्र है, तो यहां अब तक जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना क्यों नहीं की गई।
यह नोटिस मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि सरकार का यह फैसला न केवल अनुचित है, बल्कि हजारों व्यापारियों और करदाताओं के लिए न्याय तक पहुंच को भी कठिन बना रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद कर संबंधी विवादों के निपटारे के लिए GST Appellate Tribunal की व्यवस्था की गई थी। मध्य प्रदेश में फिलहाल इसकी राज्यपीठ केवल भोपाल में स्थापित की गई है। जबकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 18 दिसंबर 2019 को हुई जीएसटी काउंसिल की 38वीं बैठक में राज्यपीठ इंदौर में स्थापित करने पर सहमति बनी थी।
इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी इंदौर में ट्रिब्यूनल की स्थापना नहीं की गई, जिससे व्यापारिक समुदाय को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में क्या दलील दी गई?
मध्य प्रदेश टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस.एन. गोयल ने बताया कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में कारोबारी, उद्योगपति और करदाता रहते हैं। इसके अलावा इंदौर में पहले से ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ और राज्य जीएसटी आयुक्त कार्यालय मौजूद हैं।
ऐसी स्थिति में जीएसटी ट्रिब्यूनल को इंदौर के बजाय केवल भोपाल में स्थापित करना पूरी तरह मनमाना निर्णय प्रतीत होता है। इससे करदाताओं को हर अपील के लिए भोपाल जाना पड़ता है, जिससे समय, धन और संसाधनों की अतिरिक्त लागत बढ़ जाती है।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन?
याचिका में यह भी कहा गया है कि इंदौर में ट्रिब्यूनल स्थापित न करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) की भावना के विपरीत है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि न्याय तक आसान और समान पहुंच प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। यदि प्रदेश के सबसे बड़े व्यापारिक शहर के करदाताओं को केवल अपील दाखिल करने के लिए दूसरे शहर जाना पड़े, तो यह न्याय तक समान पहुंच के सिद्धांत का उल्लंघन माना जा सकता है।
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हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि जब जीएसटी काउंसिल की बैठक में इंदौर का नाम सामने आया था, तब बाद में केवल भोपाल में राज्यपीठ स्थापित करने का आधार क्या था।
सरकार के जवाब के बाद अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी और आवश्यकता पड़ने पर विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी कर सकती है।
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व्यापारिक समुदाय की बढ़ी उम्मीदें
हाईकोर्ट के इस कदम के बाद इंदौर के व्यापारियों, टैक्स विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित जीएसटी ट्रिब्यूनल की मांग को अब न्यायिक स्तर पर गंभीरता से सुना जाएगा। उनका मानना है कि यदि इंदौर में ट्रिब्यूनल स्थापित होता है तो न केवल करदाताओं को राहत मिलेगी, बल्कि कर विवादों के निपटारे की प्रक्रिया भी अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक हो सकेगी।
अब सभी की नजरें केंद्र और राज्य सरकार के उस जवाब पर टिकी हैं, जो उन्हें अगले छह सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद यह तय होगा कि प्रदेश के सबसे बड़े व्यावसायिक शहर इंदौर को जीएसटी ट्रिब्यूनल की राज्यपीठ मिलने का रास्ता साफ होता है या नहीं।
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