UP News: पति की हत्याकर शव बोरे में भरकर फेंका, प्रेमी सहित तीन को आजीवन कारावास

आगरा में जूते के कारखाना संचालक नरेश हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। 14 साल की बेटी की गवाही पर पत्नी, प्रेमी और उसके भाई को उम्रकैद की सजा मिली।

UP News: उत्तर प्रदेश के आगरा में वर्ष 2021 के चर्चित ताजगंज हत्याकांड में विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने जूता कारखाना संचालक नरेश कुमार की हत्या के जुर्म में उनकी पत्नी, उसके प्रेमी और प्रेमी के भाई को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों आरोपियों पर कुल 2.80 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

इस खौफनाक हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में मृतक की 14 वर्षीय मासूम बेटी की साहसिक गवाही सबसे अहम कड़ी साबित हुई।

बेटी का सनसनीखेज खुलासा

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय मासूम बच्ची की उम्र महज 10 वर्ष थी। अदालत में दी गई अपनी गवाही में उसने बताया कि घटना वाली रात उसकी मां ने तीनों भाई-बहनों को एक कमरे में बंद कर बाहर से कुंडी लगा दी थी। बच्चों को कोल्ड ड्रिंक दी गई और घर में टीवी की आवाज काफी तेज कर दी गई ताकि अंदर की चीख-पुकार बाहर न सुनाई दे।

रात करीब 3 बजे जब दरवाजा खुला, तो कमरे के बेड पर खून के धब्बे थे। मां ने देर रात स्नान किया था और कमरे का सामान बिखरा हुआ था। मासूम बेटी की इस गवाही ने कातिल मां की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

बोरे में बंद मिला था शव

8 जून 2021 की सुबह ताजगंज क्षेत्र के नगला कली स्थित पुष्पांजलि होम्स के पीछे एक खाली प्लॉट में बोरे में बंद नरेश का शव मिला था।  घटनास्थल के पास खून से सनी ईंट और शराब की बोतल बरामद हुई। शव से थोड़ी दूरी पर एक बोरा मिला, जिसमें खून से सने कपड़े, बेडशीट, तकिया और दस्ताने रखे हुए थे। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से प्रेमिता और उसके प्रेमी रविकांत के बीच लगातार बातचीत के प्रमाण मिले।

ऐसे शुरू हुई थी प्रेम कहानी

जांच में सामने आया कि आरोपी महिला प्रेमिता और उसका प्रेमी रविकांत राजपूत एक ही राजनीतिक दल के कार्यकर्ता थे। काम के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। जब पति नरेश कुमार ने इस अवैध संबंध का विरोध किया, तो प्रेमिता ने प्रेमी रविकांत और उसके भाई शशिकांत के साथ मिलकर नरेश को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।

कोर्ट में अभियोजन की ओर से 10 प्रमुख गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जुर्म साबित किया गया। विशेष न्यायाधीश शिव कुमार ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए तीनों दोषियों प्रेमिता, रविकांत और शशिकांत को उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल भेज दिया।

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