तुर्किये, सऊदी अरब-पाकिस्तान के बीच जल्द होगा संयुक्त रक्षा समझौता

'इस्लामिक नाटो' जैसी सुरक्षा व्यवस्था बनने की अटकलें तेज

रक्षा और आर्थिक सहयोग के ढांचे का विस्तार 

पाकिस्तान पर हमला किया तो ठीक नही

इस्लामाबाद। तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान सऊदी अरब में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इन देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ने और कथित ‘इस्लामिक नाटो’ जैसी सुरक्षा व्यवस्था बनने की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, पाकिस्तान पहले ही साफ कर चुका है कि यह व्यवस्था किसी देश के खिलाफ नहीं होगी। उसका कहना है कि इसका मकसद क्षेत्रीय शांति को मजबूत करना और बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से मौजूद रक्षा और आर्थिक सहयोग के ढांचे का विस्तार किया जा सकता है। इसमें भविष्य में कतर और तुर्किये को भी शामिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि इस प्रस्ताव पर अलग-अलग स्तर पर चर्चा चल रही है और इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है। यदि कतर और तुर्किये इसमें शामिल होते हैं तो यह क्षेत्र के लिए एक मजबूत आर्थिक और रक्षा सहयोग मंच बन सकता है। ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि इस तरह का समझौता किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और सुरक्षा के मामलों में बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना है। दुनिया के सभी देश एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन अपने क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए ऐसा सहयोग जरूरी है।

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