
अकेलेपन का सहारा इमोशनल अफेयर.. क्या जानते हैं आप?
Relationship: आजकल के आधुनिक दौर में एक उम्र के बाद अक्सर देखा जाता है कि लोग जीवन में अकेलापन महसूस करने लगते हैं। ऐसे समय में उन्हें किसी ऐसे साथी की तलाश रहती है, जो उनके जीवन में दोबारा से खोई हुई खुशियों को लौटाने में मदद करे।

मानव एक भावनात्मक प्राणी है, जिसका मतलब है कि हमें जीवन में कभी न कभी किसी दूसरे व्यक्ति की भावनात्मक जरूरत पड़ती है। आप शादीशुदा हैं या अकेले, आपको कभी न कभी एक साथी की जरूरत अवश्य लगती होगी।भागती दौड़ती जिदंगी की वजह से ज्यादातर कपल्स यह मानते हैं कि वो अपने पार्टनर को प्यार,समय और इमोशनल सपोर्ट अच्छी तरह नहीं दे पाते हैं। जिसकी वजह से दूसरे व्यक्ति को जहां इमोशनल सपोर्ट मिलता है, वह उसकी तरफ आकर्षित होने लगता है, और यही से होती हैं इमोशनल अफेयर की शुरुआत।

क्या होता है इमोशनल अफेयर?
इमोशनल अफेयर यानी किसी अन्य व्यक्ति के साथ आपका भावनात्मक जुड़ाव। इस संबंध में व्यक्ति दूसरे से इमोशनल अटैचमेंट रखता है, और उसके करीब होने या उससे बात करने पर काफी खुश होता है। इस तरह के रिश्ते में व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भावनाओं के जरिए जुड़ने लगता है। उसके करीब होने पर खुशी महसूस करता है और दूर जाने पर उदास हो जाता है। इस तरह के रिश्ते में व्यक्ति का एक दूसरे के साथ शारीरिक रूप से करीब होना जरूरी नहीं। लेकिन व्यक्ति सामने वाले व्यक्ति को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेता है।
इमोशनल अफेयर की वजह से कई बार लोग अपने ही पार्टनर से बोर होने लगते हैं। ऐसे लोग अपना ज्यादातर समय पार्टनर को देने की जगह दूसरे व्यक्ति के साथ गुजारते हैं और खुद अपने पार्टर से दूरी बनाने लगते हैं। जिसकी वजह से सालों पुराने रिश्ते की नींव भी कमजोर पड़ने लगती है।
क्या होते है संकेत?
-अकेले समय बिताने के बहाने ढ़ूंढना
-दूसरे को अपने पार्टनर से बेहतर समझना
-छोटी से छोटी बात शेयर करना
-अपनो के बीच खुश न रहना
-झूठ बोलने की आदत पड़ना
कैसे बचे?
दूसरे व्यक्ति से अपना सम्पर्क बिल्कुल खत्म कर दें। पार्टनर और फैमिली के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। पार्टनर से खुलकर बात करें और रिश्ते में प्यार बनाए रखें। अपने रिश्ते के बीच किसी तीसरे को आने का मौका ना दें। हर किसी के साथ अपनी फीलिंग्स को साझा करने से बचें।
भावनात्मक धोखे सैक्सुअल धोखे से भी कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें व्यक्ति पूरी तरह से दिल से जुड़ा हुआ होता है। ऐसे में जब व्यक्ति को भावनात्मक धोखा मिलता है तो वह पूरी तरह टूटकर कई बार अवसाद की स्थिति तक में पहुंच जाता है। इमोशनल अफेयर के दौरान व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से भावनात्मक तौर से इस कदर जुड़ जाता है कि उसके बिना रहना उसके लिए काफी मुश्किल हो जाता है। लोग अपनी जरूरतों के चलते अपने रिश्ते खराब कर बैठते हैं।
मनुष्य एक सामाजिक प्रजाति है जिसे जीवित रहने के लिए सुरक्षित और संरक्षित सामाजिक परिवेश की आवश्यकता होती है। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए संतोषजनक सामाजिक संबंध आवश्यक हैं। बिगड़े हुए सामाजिक संबंध अकेलेपन का कारण बन सकते हैं।

इंसान के विचार समुद्र की लहरों की तरह हरदम मचलने को तैयार रहते हैं, वहीं उस की भावनाओं की कोई थाह नहीं होती और यही भावनाएं हमें अपनों से जोड़े रखती हैं। इमोशन अफेयर सीधा दिल से जा कर जुड़ता है। जरूरी नहीं कि इमोशन अफेयर सिर्फ अपनों से ही जोड़ा जाए, बल्कि यह कभी भी किसी के भी साथ जुड़ सकता है।

कई भावनात्मक रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन का कोई नाम नहीं होता। इन में एकदूसरे के प्रति प्रेम, अपनेपन का भाव होता तो है, लेकिन जरूरी नहीं कि इन के बीच शारीरिक आकर्षण भी हो। इसे हम दिल का रिश्ता कहते हैं। इस में उम्र का कोई बंधन नहीं होता है।
किसी भी व्यक्ति के साथ भावनात्मक लगाव पहले से ही निर्धारित नहीं होता, न ही इस का कोई अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई कब, कहां, किस के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाए और यह लगाव इतना गहरा हो जाए कि व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित महसूस करने लगे।





