कब से शुरू करना चाहिए संतोषी माता का व्रत? जानिए नियम व पूजा विधि

Santoshi Mata

हिंदू धर्म में शुक्रवार को किए जाने वाले संतोषी माता के व्रत का विशेष महत्व है। संतोषी माता को हिंदू धर्म में सुख, शांति और वैभव का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं। कहा जाता है कि माता संतोषी की पूजा करने से जीवन में संतोष का प्रवाह होता है। माता संतोषी की पूजा करने से धन और विवाह संबंधी समस्याएं भी दूर होने की मान्यता है।

माता संतोषी का व्रत कब से शुरू करना चाहिए?

शुक्रवार को रखा जाने वाले माता संतोषी का व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है। सुख-सौभाग्य की प्राप्ति के लिए माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत किए जाने का विधान है।

संतोषी मां के व्रत में क्या खाया जाता है?

संतोषी माता का व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष को खट्टी चीज का सेवन और स्पर्श नहीं करना चाहिए। माता संतोषी को भोग लगाने वाला प्रसाद गुड़ व चने व्रती को भी खाने चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से माता रानी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

मां संतोषी के स्वरूप को मां दुर्गा के सबसे शांत, कोमल रूपों में से एक माना जाता हैं।

संतोषी माता कमल के फूल में विराजमान हैं।

ऐसे में माता संतोषी की पूजा के दौरान उन्हें कमल का पुष्प अर्पित करना चाहिए।

माता संतोषी पूजा विधि-

माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत किए जाने का विधान है।

सूर्योदय से पहले उठकर घर की सफाई आदि कर लें।

स्नान करने के बाद घर में पवित्र स्थान पर माता संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

अब माता संतोषी के संमुख एक कलश जल भर कर रखें।

 कलश के ऊपर  एक कटोरा भर कर गुड़ व चना रखें।

संतोषी माता के सामने एक घी का दीपक जलाएं।

माता संतोषी को अक्षत, फ़ूल, सुगन्धित गंध, नारियल, लाल वस्त्र या चुनरी अर्पित करें।

माता संतोषी को गुड़ व चने का भोग लगाए।

अब माता रानी की आरती उतारें।

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