Sikkim में अनोखी मुहिम… ग्रीन वॉक! वाहन छोड़ वन मंत्री चले पैदल

Green Walk : सिक्किम में चल रहे ‘पर्यावरण पर्व’ के तहत ‘ग्रीन वॉक’ पहल ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों का ध्यान खींचा है। इस अनोखी मुहिम के तहत सरकारी अधिकारियों और नागरिकों ने वाहनों का उपयोग छोड़कर अपने कार्यस्थल तक पैदल जाने का फैसला किया। हर साल 1 से 14 जुलाई तक मनाए जाने वाले इस अभियान की शुरुआत दो साल पहले मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने की थी।

इस साल वन मंत्री पिंटसो नामग्याल लेप्चा सहित कई अधिकारियों ने अपने दफ्तर तक पैदल जाने का विकल्प चुना। वन मंत्री लेपचा ने कहा, “मुख्यमंत्री ने प्रकृति को उत्सव की तरह मनाने का सपना देखा था, जिसने सिक्किम पर्यावरण पर्व का रूप लिया। ग्रीन वॉक इसकी सबसे प्रभावी पहल है। यह छोटा-सा कदम उत्सर्जन कम करने, ईंधन बचाने और व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में बड़ा बदलाव ला सकता है।”

इस साल गंगटोक के एमजी मार्ग, स्यारी और ताडोंग जैसे इलाकों से कई अधिकारी 20-25 मिनट पैदल चलकर अपने दफ्तर पहुंचे।

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वन विभाग के सलाहकार तेनजिन लामथा ने कहा, “यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में सामूहिक प्रयास है। वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर कॉलेज छात्रों तक की भागीदारी सिक्किम की टिकाऊ जीवनशैली के प्रति गंभीरता को दर्शाती है।”

सिक्किम में प्रतिदिन 300-400 नए वाहनों का पंजीकरण हो रहा है, ऐसे में यह पहल और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वन सचिव प्रदीप कुमार (आईएफएस) ने कहा, “अगर आपका दफ्तर पैदल दूरी पर है, तो महीने में एक बार पैदल चलने का विकल्प चुनें। यह छोटा बदलाव कई लोगों द्वारा अपनाए जाने पर बड़ा असर डाल सकता है।”

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पिछले साल ग्रीन वॉक के दौरान एक दिन में 500-600 लीटर पेट्रोल की बचत हुई थी। लामथा ने बताया कि यह पहल सिक्किम की व्यापक पर्यावरण नीतियों का हिस्सा है, जैसे हर नवजात के लिए 108 पेड़ लगाने की नीति। यह संख्या वैज्ञानिक आधार पर तय की गई है, क्योंकि इतने पेड़ एक व्यक्ति के सालाना 2.4 टन कार्बन फुटप्रिंट को संतुलित करने के लिए 2.7 टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर सकते हैं।

यह सिक्किम की प्रकृति के प्रति श्रद्धा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। ‘मदर अर्थ डे’ जैसे अन्य अभियान भी इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

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