दिल की बातें साझा करने से कम होता है अल्जाइमर का जोखिम

नई दिल्ली। कहते हैं बांटने से दु:ख कम होता है लेकिन एक हालिया अध्ययन के अनुसार दुख-दर्द बांटने से अल्जाइमर का जोखिम भी कम होता है। इस नए अध्ययन में पाया गया है कि वयस्कता में सहयोगात्मक सामाजिक संपर्क याददाश्त में होने वाली गिरावट को रोकने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि किसी ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति का पास होना, जिससे आप दिल की बातें साझा कर सकते हैं वह आपकी याददाश्त को कम होने से बचा सकता है। जरूरत के वक्त ऐसे व्यक्ति के साथ गम बांटना संज्ञानात्मक लचीलेपन से जुड़ा होता है।
कई न्यूरोलॉजिस्ट मानते हैं कि मानसिक रूप से सक्रिय रखने वाली गतिविधियों, शारीरिक व्यायाम और सकारात्मक सामाजिक बातचीत में शामिल होने से इस लचीलेपन को बढ़ाया जा सकता है।
संज्ञानात्मक लचीलापन बढ़ेगा
एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोलॉजी के सहायक प्रोफेसर और विभाग के सदस्य जोएल सेलिनास और डेविड जे लेविडो का कहना है कि संज्ञानात्मक लचीलापन मस्तिष्क की उम्र बढ़ाने और बीमारी के प्रभावों के लिए एक बफर के रूप में काम करता है।
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यह अध्ययन इस बात को साबित करता है कि लोग अपने लिए या उन लोगों के लिए कदम उठा सकते हैं जिनकी वे सबसे अधिक परवाह करते हैं।
संवाद की कमी उम्र बढ़ने के साथ-साथ याददाश्त को कम कर देगी। वहीं किसी से बातचीत करते रहना अल्जाइमर रोग के लक्षणों के विकास को रोक सकता है।





