
बिहार चुनाव से पहले आचार्य प्रशांत की अपील… “रूटीन वोट नहीं, विवेकपूर्ण वोट दें”
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं। इस अवसर पर दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत ने नागरिकों से अपील की है कि वे वोट को केवल लोकतांत्रिक औपचारिकता न समझें, बल्कि इसे जागृति और विवेक का अवसर मानें।
मतदाता जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी
आचार्य प्रशांत ने कहा कि किसी भी सरकार की गुणवत्ता उसे चुनने वाले लोगों की गुणवत्ता से अधिक नहीं हो सकती। जब लोग आदत, जाति या गुस्से के आधार पर वोट देते हैं, तो चुनाव मात्र रस्म बनकर रह जाता है। सोया हुआ मन सोती हुई व्यवस्था को जन्म देता है।”
उन्होंने बिहार की चुनौतियों को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक भी बताते हुए कहा कि बिहार की त्रासदी यह नहीं कि वह गरीब है, बल्कि यह कि वह जागना नहीं चाहता। धन की गरीबी मिट सकती है, पर बोध और आत्मज्ञान की गरीबी नहीं।
शिक्षा, बेरोजगारी और पलायन
आचार्य प्रशांत ने बिहार की समस्याओं को शिक्षा, पलायन और रोजगार की कमी से जोड़ा। उन्होंने सरकारी आंकड़े पेश किए:
- प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹54,000, देश में सबसे कम।
- हर साल लगभग 25 लाख लोग रोजगार की तलाश में राज्य छोड़ते हैं।
- साक्षरता दर 71%, महिला साक्षरता 61%, महिला श्रम-बल भागीदारी केवल 25%।
“जिस भूमि ने संसार को बुद्ध दिया, वही आज अपने बच्चों को अच्छा स्कूल नहीं दे पा रही। बिहार का पुनर्निर्माण शिक्षा से शुरू होगा।”
सामाजिक चेतना, कानून-व्यवस्था और जनसंख्या
आचार्य प्रशांत ने शिक्षा की उपेक्षा को बेरोजगारी और अपराध का कारण बताया कि जब मतदाता भीतर से अज्ञानी होता है, तो हर क्षेत्र उसी अज्ञान से अव्यवस्था दर्शाता है। बिहार अब भी लंबित न्यायिक मामलों में शीर्ष पर है और प्रति व्यक्ति बिजली खपत राष्ट्रीय औसत का केवल एक-तिहाई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि सुधारों को निष्फल कर देती है। स्त्री की स्थिति समाज की परिपक्वता का पैमाना है। महिलाओं की शिक्षा और परिवार नियोजन जीवन की शर्त हैं।”
निर्वाचन व्यवहार और भ्रष्टाचार
बिहार का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार दफ्तरों में नहीं, दिमाग में है। जाति, मुफ्तखोरी और भावनाएँ वोट का निर्धारण करती हैं। ईवीएम केवल उस अज्ञान का दृश्य है।
उम्मीदवारों के चयन पर मार्गदर्शन
आचार्य प्रशांत ने मतदाताओं को कहा कि स्पष्ट रूप से अयोग्य, भ्रष्ट, हिंसक या विभाजनकारी उम्मीदवारों को हटाएँ और बची हुई उम्मीदवारों में सबसे कम हानिकारक और ईमानदार को चुनें।
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बिहार की सांस्कृतिक विरासत
बिहार की विरासत उज्ज्वल है: बुद्ध, महावीर, नालंदा। पर यह केवल स्मृति नहीं, बल्कि जीवित आचरण और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी में दिखनी चाहिए।
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अंतिम संदेश
बिहार का असली परिवर्तन मन से शुरू होगा। जब मतदाता जागरूक और विवेकपूर्ण निर्णय लेंगे, तभी राज्य में वास्तविक बदलाव आएगा। चुनाव दलों के बीच नहीं, बल्कि स्पष्टता और भ्रम, प्रकाश और अंधकार, जागरण और जड़ता के बीच होता है।
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