आलोक राज का अध्यक्ष पद से इस्तीफा… नियुक्ति के तीन दिन बाद छोड़ी जिम्मेदारी

BSSC Bihar: बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) में उस समय बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष आलोक राज ने पदभार संभालने के महज तीन दिन के भीतर ही इस्तीफा दे दिया। उनके इस अचानक फैसले ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक राज ने अमर उजाला से बातचीत में इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि “कुछ परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं, जिनके चलते यह फैसला लेना पड़ा। इससे अधिक कुछ कहना उचित नहीं होगा।” हालांकि उन्होंने कारणों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन उनके संक्षिप्त बयान से यह साफ है कि फैसला सामान्य नहीं था।

1 जनवरी को हुई थी नियुक्ति
गौरतलब है कि 1 जनवरी 2026 को बिहार कर्मचारी चयन आयोग के स्थायी अध्यक्ष के रूप में आलोक राज की नियुक्ति की अधिसूचना नीतीश कुमार सरकार द्वारा जारी की गई थी। यह नियुक्ति इसलिए भी चौंकाने वाली थी क्योंकि कुछ समय पहले ही उन्हें बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) पद से हटाया गया था।

DGP पद से हटाए जाने के बाद मिला था अतिरिक्त प्रभार
दिसंबर 2024 में नीतीश सरकार ने आलोक राज को DGP पद से हटा दिया था। इसके बाद, राज्य के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में शामिल आलोक राज को एक सप्ताह के भीतर ही BSSC अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वे 31 दिसंबर 2025 तक इस अतिरिक्त जिम्मेदारी का निर्वहन करते रहे। सेवानिवृत्ति के साथ ही सरकार ने उन्हें आयोग का स्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया, लेकिन पदभार ग्रहण करने के तीन दिन के भीतर ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

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पहले से लग रहे थे कयास
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, DGP पद से समय से पहले हटाए जाने के बाद यह माना जा रहा था कि आलोक राज सेवानिवृत्ति के बाद सरकार की किसी भी संवैधानिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे में BSSC अध्यक्ष पद की अधिसूचना अपने आप में चौंकाने वाली थी, और अब उनका त्वरित इस्तीफा इन अटकलों को और बल देता है।

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नेतृत्व को लेकर बनी असमंजस की स्थिति
आलोक राज के इस्तीफे के बाद BSSC में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। आयोग के माध्यम से होने वाली कई महत्वपूर्ण भर्तियां पहले से लंबित हैं, ऐसे में अध्यक्ष पद का रिक्त होना भर्ती प्रक्रियाओं पर असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार जल्द ही नए अध्यक्ष की नियुक्ति या किसी वरिष्ठ अधिकारी को अस्थायी प्रभार सौंपने का फैसला कर सकती है।

फिलहाल, आलोक राज का यह अप्रत्याशित कदम बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया सवाल खड़ा कर गया है—क्या यह केवल “परिस्थितियों” का परिणाम था या इसके पीछे कोई गहरी वजह है?

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