Houthi: हूती विद्रोहियों पर अमेरिका-ब्रिटेन का हमला, कई ठिकाने स्ट्राइक में हुए तबाह

यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकाने पर बमबारी हुई है. बता दें अमेरिकी और ब्रिटिश सेना ने बम बरसाए हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन ने यमन में हूती आतंकियों से जुड़ी साइटों के खिलाफ हमले शुरू कर दिए हैं. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने पिछले साल के अंत में लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को निशाना बनाना शुरू कर दिया था.

इमेज क्रेडिट : सोशल मीडिया

अमेरिकी सेना ने शनिवार की सुबह एक बार फिर से यमन के हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। लाल सागर में हूतियों के बढ़ते हमलों का जवाब देते हुए गुरुवार को ब्रिटेन और अमेरिका की फौज ने पहला हमला किया था। इसके बाद शुक्रवार रात को फिर से दोनों देशों की फौज ने यमन में बम बरसाए हैं। अमेरिकी सेना ने कई खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल यमन में हूतियों को निशाना बनाने के लिए किया है। इसमें टॉमहॉक मिसाइलें, जेट और रीपर ड्रोन भी शामिल हैं।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि शुक्रवार को उनकी सेना ने लाल सागर शिपिंग पर हमला करने की हूतियों की क्षमता को कम करने के लिए यमन में कई स्थानों पर हमले किए हैं। ये हमले लड़ाकू विमानों और टॉमहॉक मिसाइलों से किए गए। जिसमें हूतियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

28 जगहों को अमेरिका ने बनाया निशाना
शुक्रवार को अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त हमले में 28 स्थानों पर हूती विद्रोहियों के 60 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए थे। साथ ही अमेरिका ने अपने व्यापारिक जहाजों को कुछ दिनों तक लाल सागर से दूर रहने की सलाह दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हूतियों पर हवाई हमले की पुष्टि करते हुए ही कहा था कि अगर हूती विद्रोहियों ने व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं किया तो उन पर फिर से निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिका के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है, जो पहले से ही इस्राइल हमास युद्ध की वजह से तनाव से जूझ रहा है। 

जवाबी कार्रवाई में हूती विद्रोहियों ने दी चेतावनी
वहीं अमेरिका के हमलों के बाद हूती विद्रोहियों ने भी जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। हूती सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याहया सारी ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका को इन हमलों की सजा मिलेगी। अमेरिका का कहना है कि हवाई हमलों में हूती विद्रोहियों के उन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जहां ज्यादा जनसंख्या नहीं थी और खासकर हूतियों के हथियारों, रडार और अहम ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों में ज्यादा लोगों की मौत की आशंका नहीं है। 

गौरतलब है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही इस्राइल हमास युद्ध के बाद से लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे थे। अमेरिकी नौसेना ने कई बार हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम किया था। हालांकि बार-बार चेतावनी के बावजूद हूती विद्रोहियों का जहाजों को निशाना बनाना जारी था। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट बाधित हो रहा था। यही वजह रही कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ब्रिटेन ने शुक्रवार को यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर भारी गोलाबारी की।

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