महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है शतावरी, जानें फायदे

Health: शतावरी आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण औषधि है, जिसे खासकर महिलाओं के लिए वरदान माना जाता है। आज के समय में बहुत सी महिलाएं पीसीओएस, अनियमित पीरियड्स, हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही हैं। ऐसे में शतावरी उनके लिए विशेष लाभकारी है।

शतावरी का पौधा और गुण
शतावरी झाड़ीदार पौधा होता है, जिसकी जड़ औषधीय गुणों से भरपूर होती है। संस्कृत में शतावरी का अर्थ है “सौ पतियों वाली”, यानी स्वस्थ, सुंदर और प्रजननक्षम स्त्री। यह शीतल, पौष्टिक, पित्त-वात शांत करने वाली और शरीर को ताकत देने वाली औषधि मानी जाती है।

  • ओवरी में सिस्ट बनने की प्रक्रिया को धीमा करती है
  • मुहांसे और चेहरे के बाल जैसी समस्याओं में राहत देती है

मासिक चक्र और प्रजनन में लाभ

  • अनियमित पीरियड्स को नियमित करती है
  • गर्भाशय को पोषण देती है
  • पीरियड्स के दर्द और अधिक ब्लीडिंग में राहत देती है
  • ओव्यूलेशन सुधारकर गर्भधारण की संभावना बढ़ाती है

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए

  • मां और भ्रूण दोनों को पोषण देती है
  • मॉर्निंग सिकनेस और यूटरस की सिकुड़न में राहत देती है
  • स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाती है

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मानसिक स्वास्थ्य और रजोनिवृत्ति में मदद

  • तनाव कम करती है और नींद को बेहतर बनाती है
  • कामेच्छा बढ़ाती है
  • रजोनिवृत्ति के समय हार्मोनल बदलाव में राहत देती है

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सेवन का तरीका
शतावरी को चूर्ण, गोली, कल्प या काढ़े के रूप में लिया जा सकता है। आमतौर पर 3 से 5 ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध के साथ रोजाना सेवन किया जाता है। ध्यान रहे कि इसे हमेशा आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा हार्मोनल ओवरस्टिमुलेशन कर सकती है।

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