बैंकों के विलय का 2.0 प्लान, देश के दूसरे सबसे बड़े मर्जर का रोडमैप…

Bank Merger 2.0: सरकार बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बड़े बैंकों के विलय का मन बना रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) और बैंक ऑफ इंडिया (BoI) के विलय पर चर्चा चल रही है.

 

बता दें कि UBI और BOI दोनों बैंकों का मुख्यालय मुंबई है. इसका उद्देश्य अगले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों के तहत ऐसे बैंकों का विस्तार करना और उनके परस्पर क्रियाकलापों को सुव्यवस्थित करना है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह विलय हो जाता है, तो एक सरकारी बैंक बनेगा जो संपत्ति के लिहाज से देश के शीर्ष बैंक, भारतीय स्टेट बैंक के बाद दूसरे स्थान पर होगा.

वर्तमान में देश का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा है, जिसकी कुल संपत्ति 30 जून 2025 तक 18.62 ट्रिलियन रुपये थी. यह संपत्ति आधार इसे सभी बैंकों (निजी बैंकों सहित) में एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के बाद चौथे स्थान पर रखता है.

विलय के बाद यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया की संपत्ति 25.67 ट्रिलियन रुपये होगी, जो आईसीआईसीआई बैंक (26.42 ट्रिलियन रुपये) के बराबर होगी.

इन बैंकों के पर भी नजर:
बाद के चरणों में पंजाब एंड सिंध बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के निजीकरण पर विचार किया जा सकता है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में परिसंपत्तियों के आधार पर निचले स्थान पर है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी नियंत्रण वाले अन्य बैंकों के विलय पर भी विचार किया जा सकता है. हालांकि विलय की समय-सीमा अभी तय नहीं हुई है.

विलय का उद्देश्य:
बैंकों के विलय की एक व्यापक योजना तैयार करने के पीछे सरकार का उद्देश्य कम लेकिन अधिक शक्तिशाली संस्थान स्थापित करना है, जिसमें छोटे बैंकों को बड़े बैंकों के साथ मिलाया जाएगा. इसका लक्ष्य बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत और बेहतर बनाते हुए ऋण विस्तार और वित्तीय सुधारों के अगले चरण में सहायता प्रदान करना है.

एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार कथित तौर पर इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI), और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) को पंजाब नेशनल बैंक (PNB), भारतीय स्टेट बैंक (SBI), और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) जैसे बड़े बैंकों पर विचार कर रही है.

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