IMF से फिर राहत की भीख… पाकिस्तान ने बाढ़ का हवाला देकर मांगी रियायत

Pakistan News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अपने मुल्क की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा से विशेष रियायत देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आईएमएफ से किए सभी वादों को निभा रहा है, लेकिन संस्था को 25 सितंबर को होने वाली समीक्षा बैठक में हाल ही में आई बाढ़ से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े गहरे असर को भी ध्यान में रखना चाहिए।

बाढ़ का बहाना बनाकर रियायत की मांग
शरीफ ने यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता बाढ़ जैसी आपदाओं से जूझ रही है और इससे देश की आर्थिक सेहत पर गंभीर असर पड़ा है। इसलिए आईएमएफ को अपनी समीक्षा में इन हालातों पर भी गौर करना चाहिए।

बेलआउट पैकेज की समीक्षा

  • पाकिस्तान को मई 2025 में 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज (Extended Fund Facility – EFF) की मंजूरी मिली थी।
  • इसकी 25 सितंबर को तीसरी समीक्षा होनी है, जिसमें मार्च-जून 2025 तिमाही के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
  • अगस्त में हुई पिछली समीक्षा में पाकिस्तान तीन अहम लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा था।

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पाकिस्तान की नाकामियां

  • किसी भी प्रांतीय सरकार ने 1.2 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये की बचत का लक्ष्य हासिल नहीं किया।
  • पाकिस्तान का कुल राजकोषीय घाटा GDP का 5.4% (6.2 ट्रिलियन रुपये) रहा, जबकि IMF ने 5.9% का लक्ष्य तय किया था।
  • IMF ने बेलआउट पैकेज के लिए करीब 50 शर्तें रखी हैं, जिनमें से कुछ त्रैमासिक और वार्षिक समीक्षा के आधार पर पूरी की जानी होती हैं। अगली 1 अरब डॉलर की किश्त इन्हीं शर्तों पर निर्भर करेगी।

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IMF का रुख
बैठक के बाद पाकिस्तानी सूचना विभाग (PID) ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि जॉर्जीवा ने बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई। हालांकि, उन्होंने रियायत पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया।

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सियासी और आर्थिक संकट की दोहरी मार
पाकिस्तान लगातार कर्ज और महंगाई के दबाव में है। IMF की सख्त शर्तों के कारण सरकार को टैक्स बढ़ाने और सब्सिडी कम करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े हैं, जिससे आम जनता का जीवन और मुश्किल हो गया है। ऐसे में शहबाज शरीफ की यह अपील उनके देश की गंभीर वित्तीय कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर निर्भरता को उजागर करती है।

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