
बेंगलुरु में सजा ‘यूपी महोत्सव’ का महामंच, संस्कृति-भोजन और लोककला ने जीता दिल
UP Mahotsav: आईटी राजधानी Bengaluru में उत्तर प्रदेश की संस्कृति, लोककला और खानपान का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘यूपी महोत्सव’ के जरिए दक्षिण भारत में बसे प्रवासी उत्तर प्रदेशवासियों को अपनी मिट्टी और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।
यह आयोजन आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar के 70वें जन्मोत्सव और The Art of Living Foundation के 45 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित किया गया।
21 से 24 मई तक चला सांस्कृतिक उत्सव
आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस चार दिवसीय महोत्सव में अवध, ब्रज, बुंदेलखंड और पूर्वांचल की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली। लोकगीत, भक्ति संगीत, कथक, ब्रज रास और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आयोजन में हजारों लोगों ने भाग लिया और उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक विरासत को करीब से महसूस किया।
पंडित साजन मिश्र और उर्मिला श्रीवास्तव की प्रस्तुति रही आकर्षण
बनारस घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक Pandit Sajan Mishra की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से परिचित कराया। वहीं पद्मश्री सम्मानित Urmila Srivastava ने ‘गुरु वंदना’, ‘देवी वंदना’ और कजरी गायन से माहौल को भक्तिमय बना दिया।
कथक और ब्रज रास ने बांधा समां
Bhatkhande Sanskriti Vishwavidyalaya की डॉ. आरती और उनकी टीम ने कथक की मनमोहक प्रस्तुति दी। वहीं गीतांजलि और उनकी टीम ने ‘ब्रज रास’ का अलौकिक मंचन किया। सुप्रसिद्ध कथक प्रतिपादक आरती नाटू के नेतृत्व में कलाकारों ने ‘सीता स्वयंवर’ की भव्य प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
यूपी के स्वाद ने खींचा लोगों का ध्यान
महोत्सव में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का विशेष आकर्षण रहा। आगंतुकों को अवध के नवाबी पकवान, बनारस की चाट, ब्रज के पेड़े, आगरा का पेठा और यूपी के मशहूर स्ट्रीट फूड का स्वाद चखने का मौका मिला। आश्रम की रसोई में करीब 2,000 लोगों के लिए उत्तर प्रदेश शैली का विशेष महाप्रसाद भी तैयार किया गया।
हस्तशिल्प और ODOP उत्पादों की प्रदर्शनी
महोत्सव में विभिन्न जिलों के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें बनारसी सिल्क साड़ियां, लखनऊ की चिकनकारी, मिर्जापुर और भदोही के कालीन व दरियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। प्रदर्शनी के जरिए उत्तर प्रदेश की लोककला और कुटीर उद्योगों को नई पहचान मिली।
अयोध्या-काशी की आध्यात्मिक झलक
विशेष दीर्घाओं और आधुनिक इंस्टॉलेशन के माध्यम से Ayodhya, Varanasi, Mathura और Prayagraj की आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। दीपोत्सव और कुंभ मेले की भव्यता को भी आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
विशेष ट्रेनों से पहुंचे हजारों लोग
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों शिक्षक, साधक, स्वयंसेवक और परिवार इस महोत्सव में शामिल होने बेंगलुरु पहुंचे। प्रतिभागियों की सुविधा के लिए कानपुर, प्रयागराज और सतना मार्ग से दो विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई थी।
योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष सत्र
महोत्सव में बच्चों और युवाओं के लिए योग, ध्यान, तनाव मुक्ति और सुदर्शन क्रिया के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। मेधा योगा, उत्कर्ष योग और इंट्यूशन प्रोसेस जैसे सत्रों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
उत्तर और दक्षिण भारत के बीच बना सांस्कृतिक सेतु
आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में आयोजित यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु बनकर उभरा। आयोजन ने परंपरा, आध्यात्मिकता, कला और आधुनिकता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने लोगों को अपनी जड़ों और भारतीय संस्कृति से गहराई से जोड़ दिया।
अयोध्या के 108 कुंडों के पुनरुद्धार पर भी चर्चा
महोत्सव के दौरान Ayodhya Nagar Nigam और आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम के बीच अयोध्या के 108 कुंडों के पुनरुद्धार को लेकर सहयोग की चर्चा भी हुई। इसके अलावा युवा सशक्तिकरण, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
लेखक: अशोक कुमार मिश्र





