अलविदा लता दी: बतौर सांसद नहीं लिया एक भी रूपया वेतन, न ही बंगला

lata mangeshkar

नई दिल्ली। भारत रत्न लता मंगेशकर का कल 6 फरवरी को 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में  निधन हो गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। उनके निधन से संगीत की दुनिया का एक अध्याय समाप्त हो गया है।

भारत ही नहीं बल्कि पूरे उपमहाद्वीप और दुनिया भर में लोग उन्हें अपने-अपने तरीके से याद कर रहे हैं। लता मंगेशकर की गायकी के साथ ही उनके संसदीय सफर को भी लोग याद कर रहे हैं। उन्होंने 1999 से 2005 तक राज्यसभा सांसद के तौर पर देश की सेवा की थी।

इस दौरान सांसद के तौर पर उन्होंने एक रुपये का भी वेतन भत्ता नहीं लिया था। इसके अलावा दिल्ली में बतौर सांसद मिलने वाले आलीशान बंगले को भी ठुकरा दिया था।

लता मंगेशकर को उनकी बेमिसाल आवाज, सादगी और व्यवहार कुशल व्यक्तित्व के तौर पर याद किया जाएगा। लता मंगेशकर साल 1999 से 2005 तक सदन का हिस्सा रही थीं। उन्हें 22 नवंबर, 1999 को राज्यसभा का मनोनीत संसद सदस्य घोषित किया गया था।

अपने 6 सालों के कार्यकाल में उन्होंने वेतन के भेजे गए चेक्स को कभी स्वीकार नही किया और हमेशा वापस भेज दिया। एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दायक की गई आरटीआई से यह खुलासा हुआ था।

लता दीदी को भेजे सारे चेक वापस आ गए थे

आरटीआई के बाद यह पता चला था कि लता मंगेशकर के वेतन से संबंधित मामले में वेतन-लेखा कार्यालय से लता को भेजे गए सभी चेक वापस आ गए। इसके अलावा लता मंगेशकर ने कभी भी सांसद पेंशन के लिए भी आवेदन नहीं किया था। यहां तक कि उन्होंने नई दिल्ली में सांसदों को दिए जाने वाले घर को भी ठुकरा दिया।

लता मंगेशकर के अलावा क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी सांसद रहते हुए कभी न तो वेतन लिया और न ही उन्होंने नई दिल्ली में सांसदों को दिया जाने वाला घर स्वीकार किया। सचिन ने अपना पूरा सांसद वेतन 90 लाख रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिया था।

रॉयल अल्बर्ट हॉल में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय थीं लता

मप्र के इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर ने अपनी जादुई आवाज के दम पर देश ही नही विदेश में भी परचम लहराया। प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल, लंदन में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय होने का सम्मान प्राप्त है।

2007 में फ्रांस की सरकार ने उन्हें ‘लीजन ऑफ ऑनर के अधिकारी’ से सम्मानित किया, जो फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। लता मंगेशकर की उपलब्धियों को गिनना नामुमकिन है। 

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