खाद माफियाओं पर बड़ा एक्शन; 15 विक्रेताओं के लाइसेंस सस्पेंड…

UP News: उत्तर प्रदेश में खाद की मिलावट और कालाबाजारी को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में कानपुर जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सहकारी समिति समेत 15 उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इस कार्रवाई से खाद कारोबारियों में हड़कंप मच गया है और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जांच में सामने आई गड़बड़ियां
कृषि विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने हाल ही में जिले के कई क्षेत्रों में छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान खाद की गुणवत्ता, स्टॉक और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार कई दुकानों पर निर्धारित मानकों के विपरीत खाद बेची जा रही थी। कुछ जगहों पर मिलावटी उर्वरक और नकली ब्रांड के उत्पाद भी मिलने की आशंका जताई गई।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ विक्रेता निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेच रहे थे, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा था।

सहकारी समिति भी जांच के घेरे में
कार्रवाई के दौरान एक सहकारी समिति में भी अनियमितताएं पाई गईं। रिकॉर्ड में गड़बड़ी, स्टॉक का सही हिसाब न होना और वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसी शिकायतों के आधार पर समिति का लाइसेंस भी निलंबित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई
बताया जा रहा है कि किसानों से लगातार मिलावटी खाद और कालाबाजारी की शिकायतें मिल रही थीं। कई किसानों ने आरोप लगाया था कि उन्हें कम गुणवत्ता वाली खाद ऊंचे दामों पर बेची जा रही है, जिससे फसल की पैदावार पर असर पड़ रहा है।

इन शिकायतों के बाद प्रशासन ने अभियान चलाकर दुकानों की जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की।

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सरकार का सख्त संदेश
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खाद और बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच अभियान चलाए जाएं।

यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

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आगे भी जारी रहेगा अभिया
कृषि विभाग ने संकेत दिया है कि मिलावट और कालाबाजारी के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। दोषी दुकानदारों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

इस कार्रवाई को किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को सही गुणवत्ता का उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा।

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