कानपुर में आतंकी फंडिंग का बड़ा खुलासा, 132 संदिग्धों ने रातोंरात किया पलायन

Delhi Blast Updates: दिल्ली में हुए आत्मघाती धमाके और फरीदाबाद में मिले रिकॉर्ड विस्फोटक के बाद जांच एजेंसियों की निगाहें अब उत्तर प्रदेश के कानपुर पर टिक गई हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और यूपी एटीएस को शहर के घनी बस्तियों में सक्रिय तीन स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के बैंक खातों में आतंकी फंडिंग का बड़ा नेटवर्क मिला है, जिसके तार मास्टरमाइंड डॉ. शाहीन सईद से जुड़े हैं।

संदिग्ध फंडिंग और विदेशी कनेक्शन
जांच में सामने आया कि इन एनजीओ के खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं, जिनमें विदेशी स्रोतों से भी बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। यह नेटवर्क दिल्ली ब्लास्ट की मुख्य आरोपी लखनऊ निवासी डॉ. शाहीन सईद और उसके सहयोगी डॉ. आरिफ मीर से जुड़ा पाया गया है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह पैसा स्थानीय स्लीपर सेल तैयार करने और आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। NIA इन एनजीओ के पिछले पांच सालों की बैंक डिटेल, दस्तावेज़, और संबंधित कर्मचारियों के पासपोर्ट व आधार कार्ड की गहन जांच कर रही है।

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युवती के माध्यम से संदिग्ध गतिविधि
फंडिंग की पड़ताल में पता चला कि एनजीओ खातों से स्थानीय युवतियों के बैंक खातों में भी पैसे ट्रांसफर किए गए। रायपुरवा इलाके से एक युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। युवती ने बताया कि उसका खाता यह कहकर खुलवाया गया था कि विदेश में ज़रूरतमंदों की मदद के लिए पैसे सीधे उसके खाते में भेजे जाएंगे, जबकि एटीएम और चेकबुक एनजीओ संचालकों के पास रहते थे।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन खातों का इस्तेमाल ‘हनी ट्रैप’, मानव तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था। युवती को फिलहाल ‘शहर न छोड़ने’ की शर्त पर छोड़ दिया गया है।

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132 संदिग्धों का सामूहिक पलायन
दिल्ली धमाके के बाद कानपुर के संवेदनशील और घनी आबादी वाले मोहल्लों से 132 संदिग्ध लोग रातोंरात गायब हो गए हैं। इनमें ज्यादातर लोग हाल ही में किराये पर रह रहे थे और पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। इन संदिग्धों के घरों पर अब ताले लगे हुए हैं। एटीएस पूरे प्रदेश में इन 132 लोगों की तलाश में अलर्ट जारी कर चुकी है।

जांच एजेंसियों की चुनौती
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि कानपुर में यह आतंकी नेटवर्क बेहद संगठित और खतरनाक था। NIA और यूपी एटीएस इस नेटवर्क के ठिकानों, संदिग्धों और वित्तीय लेन-देन की पूरी जांच कर रहे हैं ताकि किसी बड़े हमले की आशंका को समय रहते रोका जा सके।

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