BMC आयुक्त के आदेश पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, कोर्ट कर्मचारियों की चुनावी ड्यूटी पर लगाई रोक

Maharashtra News: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर द्वारा जारी उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कमिश्नर ने निचली अदालतों के कर्मचारियों को भी चुनावी ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने इस आदेश के तहत अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने के अधिकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मुख्य न्यायाधीश के आवास पर विशेष सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस अश्विन भोबे की पीठ ने मंगलवार रात को मुख्य न्यायाधीश के आवास पर विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि बीएमसी कमिश्नर, जो जिला चुनाव अधिकारी के रूप में भी कार्यरत हैं, उन्हें हाईकोर्ट या निचली अदालत के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी के लिए कोई पत्र या अन्य माध्यम से आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।

पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने सितंबर 2008 में यह निर्णय लिया था कि हाईकोर्ट और निचली अदालतों के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट दी जाएगी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की।

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बीएमसी कमिश्नर ने अनुरोध को किया अस्वीकार
वहीँ, जिस दिन बीएमसी कमिश्नर ने आदेश जारी किया, उसी दिन चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने बीएमसी कमिश्नर और मुंबई के कलेक्टर को सूचित किया कि कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का अनुरोध किया गया है। इसके बावजूद बीएमसी कमिश्नर ने 29 दिसंबर को निचली अदालत के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

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हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा
सुनवाई के दौरान बीएमसी की तरफ से पेश वकील कोमल पंजाबी ने कमिश्नर द्वारा जारी पत्र को वापस लेने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि किस अधिकार के तहत उन्होंने अदालत के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी के लिए बुलाने का आदेश दिया।

साथ ही, उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग, राज्य चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार को भी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी को होगी।

कानूनी आधार
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत, हाईकोर्ट को अधीनस्थ अदालतों और उनके स्टाफ पर पूरा नियंत्रण और निगरानी का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर कोर्ट स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का आदेश पहले ही पारित किया गया था।

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