केंद्र ने ‘संचार साथी’ ऐप प्री-इंस्टॉलेशन का आदेश लिया वापस, डिजिटल सुरक्षा जारी

Sanchar Sathi App: केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन में ‘संचार साथी’ ऐप को पहले से इंस्टॉल करने का फैसला वापस ले लिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने बुधवार को कहा कि ऐप की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब इसे मोबाइल कंपनियों के लिए अनिवार्य नहीं किया जाएगा।

DoT के अनुसार, बुधवार दोपहर 12 बजे तक ऐप के 1.40 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं, और दो दिन में स्वैच्छिक डाउनलोड की संख्या में 10 गुना वृद्धि हुई है।

सिंधिया का बयान: ऐप जासूसी नहीं करता
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि ऐप किसी भी नागरिक की निजी जानकारी नहीं पढ़ता और न ही कॉल सुनता है।

  • ऐप वैकल्पिक है।
  • उपयोगकर्ता इसे कभी भी हटा सकते हैं।
  • यदि रजिस्टर नहीं करते, तो ऐप इनएक्टिव रहेगा।
  • केवल वही नंबर या SMS ऐप एक्सेस करेगा जिसे यूजर खुद फ्रॉड या स्पैम के रूप में रिपोर्ट करता है।

बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि ऐप डिजिटल सुरक्षा का टूल है और चोरी या फर्जी IMEI नंबर रोकने में मदद करता है।

विपक्ष का आरोप: नागरिकों की प्राइवेसी पर हमला
विपक्ष ने संचार साथी ऐप को “जासूसी एप” और नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल बताते हुए केंद्र पर निशाना साधा।

  • कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यह ऐप सरकार को हर नागरिक की निगरानी का मौका देता है।
  • राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने कार्यस्थगन प्रस्ताव भी पेश किया, लेकिन चर्चा नहीं हो सकी।

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पहले का आदेश
28 नवंबर को DoT ने मोबाइल कंपनियों को आदेश दिया था कि:

  • नए स्मार्टफोन में ऐप प्री-इंस्टॉल किया जाए।
  • पुराने फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इंस्टॉल किया जाए।
  • ऐप को डिलीट या डिसेबल नहीं किया जा सके।

कंपनियों को इसे लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था।

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संचार साथी ऐप क्या करता है?

  • लॉन्च: 17 जनवरी 2025
  • उद्देश्य: साइबर फ्रॉड, चोरी और फर्जी IMEI नंबर रोकना
  • यूजर को कॉल, SMS और व्हाट्सऐप फ्रॉड रिपोर्ट करने में मदद
  • चोरी/गुम फोन ब्लॉक और ट्रैक करने की सुविधा

सरकार का कहना है कि इस ऐप से अब तक 7 लाख से अधिक चोरी/गुम मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं।

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